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अंग्रेजों की धरती पर जीते बल्लेबाज विराट कोहली, कप्तान की हुई हार

Wed, 12 Sep 2018 06:47 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 12 Sep 2018 06:47 PM IST
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virat kohli succesfull as batsman but not as a captain on england tour
विराट कोहली

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और दोनों तरफ हेड नहीं हो सकता। इस बात को एक क्रिकेटर से बेहतर शायद ही कोई समझ सकता है। विराट कोहली की किस्मत को इंग्लैंड में सिर्फ सिक्के की उछाल ने दगा नहीं दिया बल्कि एक ही वक्त पर दो मोर्चों पर धमाल करने की ख्वाहिश भी अधूरी रह गई।



बल्लेबाज कोहली ने इंग्लैंड के खिलाफ़ टेस्ट सिरीज में खूब रंग जमाया लेकिन कप्तानी के मोर्चे पर लगातार पांच टॉस हारने वाले कोहली नतीजे की कसौटी पर 1-4 से पिछड़ गए। टेस्ट सिरीज खत्म होने के बाद ये टीस कोहली को भी परेशान करती दिखी। 'कुछ चीजें होंगी जिन्हें लेकर हम सोचेंगे कि उन्हें अवसर बनाया जा सकता था।'

जीत का सेहरा कप्तान के सिर बंधता है तो हार के बाद सबसे ज्यादा सवाल भी कप्तान से ही पूछे जाते हैं। सवाल ये है कि क्या बल्लेबाज कोहली ने इंग्लैंड में अपने प्रदर्शन से जो मौके बनाए उन्हें कप्तान कोहली भुना नहीं पाए? क्या टीम मैनेजमेंट के फैसले एक ऐसी सिरीज में भारत की हार की वजह बने, जहां कई बार मेहमान टीम मेजबानों पर हावी नजर आ रही थी?

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virat kohli

सीरीज खत्म होने के बाद कोहली ने खुद आकलन किया, 'दूसरे टेस्ट को छोड़ दें तो हम हर मैच में मुकाबले में थे। हमने बेखौफ होकर खेलने का फैसला किया। जब ऐसा होगा तो मुकाबले कड़े होंगे और बेहतर टीम जीत हासिल करेगी।' 

तो क्या इंग्लैंड टीम वाकई भारतीय टीम से बेहतर थी और क्या भारतीय टीम की हार की इकलौती वजह यही थी? क्रिकेट के तमाम विशेषज्ञों और टेस्ट क्रिकेट खेल चुके कई दिग्गज सिरीज शुरू होने के पहले से ही दावा कर रहे थे कि मौजूदा इंग्लैंड टीम मेहमान भारतीय टीम के मुकाबले कमजोर है। कई दिग्गजों की ये राय सिरीज के आखिर तक बनी रही और भारतीय टीम की हार के लिए उन्होंने टीम मैनेजमेंट के फैसलों और बल्लेबाजों की नाकामी पर सवाल उठाए।

चयन पर सवाल

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Virat kohli

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगजीन तो यहां तक दावा करते हैं कि चयन की खामियों ने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित किया। वो कहते हैं, 'भारत ने जिस तरह से चयन किया, उससे खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना बन जाती है। इससे टीम की ताकत कम होती है।' ये राय उस टीम के बारे में है, जो टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर मौजूद है। ये आकलन अकेले मैगजीन का नहीं है।

क्रिकेट समीक्षक हर्षा भोगले ने ट्विटर पर लिखा, 'खेल में 'अगर ऐसा होता' के लिए कोई जगह नहीं होती। भारत के पास मौके थे लेकिन स्कोर कार्ड पर 4-1 दर्ज है। भारत को जितना अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए था, वो नहीं कर सका।'

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एक रोल में हिट-दूसरे में फ्लॉप

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Virat kohli 100

कप्तान कोहली के पास नाकामी को पीछे छोड़ने के लिए बल्लेबाज कोहली से प्रेरणा लेने का मौका था। कोहली ने इंग्लैंड के पिछले दौरे के पांच टेस्ट मैचों में 13।4 के बेहद मामूली औसत से 134 रन बनाए थे। इस नाकामी का 'भूत' पूरे चार साल तक उनका पीछा करता रहा।

इस बार लगा कि कोहली पिछला 'दाग' धो डालने का इरादा बनाकर आए हैं। उनका बल्ला गरजा। पांच टेस्ट मैचों में 59।3 के जबरदस्त औसत के साथ उन्होंने 593 रन बनाए। दो शतक जड़े। इस प्रदर्शन के जरिए वो टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर पहुंच गए। बतौर भारतीय कप्तान सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

लेकिन, बल्लेबाजी के मोर्चे पर बेमिसाल प्रदर्शन पर कप्तानी के मोर्चे पर मिली मायूसी हावी पड़ी। ट्रैंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 203 रन से रौंदने वाली टीम कोहली के पास बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच और साउथैम्पटन में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में भी जीत का मौका था। इंग्लैंड ने पहला टेस्ट महज 31 और चौथा टेस्ट 60 रन से जीता था।

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क्या पुजारा होते तो नतीजा बदलता?

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पुजारा

पहले टेस्ट मैच में टीम मैनेजमेंट ने चेतेश्वर पुजारा को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी। पुजारा पूरी सिरीज में तो अपने रुतबे के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए लेकिन चार मैचों में 278 रन बनाकर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। सीरीज में भारत के दूसरे सबसे कामयाब बल्लेबाज लोकेश राहुल पुजारा से एक मैच ज्यादा खेलकर और आखिरी मैच में बड़ा शतक जमाकर भी उनसे सिर्फ 21 रन ज्यादा बना सके।

टीम मैनेजमेंट को भी पहला मैच हारते ही अपनी गलती का अहसास हुआ और पुजारा को बाद के चारों मैचों में जगह दी गई। क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगजीन पुजारा को बाहर बिठाने को लेकर सवाल उठाते हैं, 'ऐसे विकेट पर आपको एक बल्लेबाज चाहिए जो विकेट पर खड़ा रह सके लेकिन आप पुजारा के बारे में सोचते ही नहीं। उसे शुरू के मैच में खिलाते नहीं हैं। फिर आप उसे वापस ले आते हैं।'

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