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सौरव गांगुलीः वो भारतीय कप्तान जिन्होंने टीम इंडिया को जीतने की आदत लगा दी

Wed, 23 Oct 2019 11:47 AM IST
Trainee Trainee स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Trainee Trainee Updated Wed, 23 Oct 2019 11:47 AM IST
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Sourav Ganguly the man who taught indian cricket team how to win abroad
सौरभ गांगुली - फोटो : social Media

भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली बुधवार को बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष बन गए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति का 30 महीने से चला आ रहा शासन खत्म हो गया। गांगुली को भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा सुधारक कहा जाता है,0 उनके पास टैलेंट को पहचानने की गजब की क्षमता है।



युवाओं पर हमेशा भरोसा जताने वाले कप्तान अब बीसीआई के बॉस बन चुके हैं। गांगुली जोशीले कप्तान थे, टीम के खिलाड़ियों पर कोई दबाव नहीं डालते, उन्हें पता था कि किन हालातों पर कौन से खिलाड़ी पर दाव लगाना है। तभी तो हरभजन के लिए चयनकर्ताओं से भिड़ गए। इन खूबियों की बदलौत गांगुली ने टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट में शिखर तक पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तान के साथ 'दादा' बन गए। ऐसे में आइए देखते हैं दादा के एक सुनहरे सफर को, जब दादा ने मैदान पर अपनी दादगिरी दिखाई।

Sourav Ganguly the man who taught indian cricket team how to win abroad
राहुल द्रविड़-सौरव गांगुली - फोटो : social Media

बीसीसीई में गांगुली का चुनाव भारतीय क्रिकेट में एक नया मोड़ लाने का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए लग रहा है, क्योंकि जब सौरव गांगुली ने साल 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभालते ही टीम की सुरत बदलकर रख दी थी। सौरव के टीम की कप्तानी उस समय मिली थी, जब भारतीय क्रिकेट संकट के दौर से गुजर रहा था। कई खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे थे। इस समय दादा ने टीम की कमान संभाली और भारतीय क्रिकेट को नए सफर के लिए तैयार कर जीत की पटरी पर दौड़ा दिया।

Sourav Ganguly the man who taught indian cricket team how to win abroad
Sourav ganguly

सौरव गांगुली ने एक कप्तान के रूप में बेहतरीन शुरुआत की, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत को पांच मैच की एक दिवसीय श्रृंखला में जीत दिलाई। दक्षिण अफ्रीका में 2003 में खेले गए विश्व कप में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। सौरव ने युवा खिलाड़ियों से भरी टीम को अपने आक्रामक फैसलों से वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा दिया। हालांकि फाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी। गांगुली के लिए व्यक्तिगत रूप से यह एक सफल टूर्नामेंट था, जिसमें उन्होंने 58.12 के औसत से 465 रन बनाए और तीन शतक जड़े।

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सौरभ गांगुली - फोटो : social Media

गांगुली की कप्तानी में भारत विदेशी जमीन पर भी अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर देने में सफल रहा। इससे पहले भारतीय टीम को विदेशी दौरे के लिए अच्छी टीम नहीं माना जाता था, लेकिन गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी से भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदल दिया। 2002 नेटवेस्ट सीरीज गांगुली की कप्तानी में खेला गया और टीम इंडिया ने अंग्रेजी जमीन पर इंग्लैंड को हराकर तिरंगा लहरा दिया और दादा ने लॉर्ड्स की बालकनी से अपनी टी-शर्ट को हवा उड़ा दिया। भारत का 2003–04 का ऑस्ट्रेलिया दौरा काफी सफल रहा। चार टेस्ट मुकाबलों की श्रृंखला 1-1 से ड्रॉ रही और भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

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युवराज सिंह और सौरव गांगुली - फोटो : सोशल मीडिया

गांगुली ने युवा खिलाड़ियों में विश्वास पैदा किया। उन्होंने खिलाड़ियों को दबाव में भी डटकर खेलना सिखाया और स्लेजिंग का जवाब स्लेजिंग से ही देने को कहा। गांगुली हमेशा से ही टीम के साथियों का साथ देते थे, जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर आक्रामक होकर खेलने की आजादी मिलती थी। यही कारण था कि भारत घर और बाहर दोनों ही जगह एक सफल टीम के रूप में उभरी। दादा ने जहीर खान, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और एम एस धोनी जैसे स्टार खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचाना और टीम में मौके दिए।

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