टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच छह दिसंबर से चार टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होने जा रही है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाज बड़ी बेसब्री से कंगारू गेंदबाजों का इंतजार कर रहे हैं। एडिलेड में होने वाली गेंद और बल्ले की इस लड़ाई में टीम इंडिया का पलड़ा भी ज्यादा भारी नजर आ रहा है।
टीम इंडिया के बल्लेबाज हमेशा से ही एडिलेड में अच्छा करते आए हैं। इसका जीता जागता उदाहरण खुद टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग हैं। जनवरी, 2008 में सहवाग की वो पारी शायद ही फैंस आज तक भूल पाए होंगे।
उस दौर में सहवाग बेहद खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। बड़ी मुश्किल से वीरेंद्र सहवाग को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ स्क्वाड में जगह मिली थी। वहीं प्लेइंग इलेवन में उन्हें शामिल करने से पहले भी कई तरह की बातें बनाई जा रही थीं, लेकिन सहवाग की एक दिलेर पारी ने आलोचकों के मुंह पर ताले जड़ दिए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए चौथे व अंतिम टेस्ट में सहवाग ने 151 रन की शतकीय पारी खेलकर 18 महीने का सूखा खत्म किया था। सहवाग ने पारी उस वक्त खेली थी, जब कंगारू गेंदबाजों के सामने टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर रही थी।
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वीरेंद्र सहवाग
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ऐसे में सहवाग ने अपना आक्रामक रुख छोड़कर एक डिफेंसिव पारी खेलते हुए भारत को संकट की स्थिति से निकाला और हारे हुए मैच को अपने दम ड्रॉ कराया। इस दौरान सगवाग ने 236 गेंदों पर 11 चौकों और दो छक्कों की मदद से 151 रन बनाए और भारत ने 7 विकेट खोकर 269 रन बनाकर यह मैच ड्रॉ कराया।