2013 से पहले एस श्रीसंत की पहचान टीम इंडिया के उस जांबाज खिलाड़ी की थी, जो मुश्किल समय में भी हार नहीं मानता। हारी हुई बाजी को अपने पक्ष में करने के लिए भी जी-जान लगा देता था। श्रीसंत की धारदार गेंदबाजी के बूते ही युवाओं से सजी भारतीय टीम 2007 में पहला वर्ल्ड टी-20 जीतने में कामयाब रही थी, लेकिन फिर स्पॉट फिक्सिंग का वह जिन्न निकला, जिसने इस खिलाड़ी का करियर चौपट कर दिया।
तिहाड़ जेल में श्रीसंत को पड़ती थी भद्दी गालियां, पांच बार आया था खुदकुशी का ख्याल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंशुल तलमले
Updated Tue, 01 Oct 2019 12:20 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन