ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम में टेस्ट रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा का शामिल नहीं किया गया। जब चयनकर्ताओं के इस निर्णय पर सवाल उठने लगे तो उन्होंने कहा कि वो अश्विन को काउंटी क्रिकेट का अनुभव लेने देना चाहते हैं। वहीं जडेजा के बारे में कहा कि उन्हें आराम दिया गया है। लेकिन जडेजा ने चयनकर्ताओं के इस निर्णय पर नाखुशी जताते हुए यह कह दिया कि उन्हें आराम नहीं दिया गया बल्कि टीम से बाहर किया गया है।
विराट नहीं इन खिलाड़ियों ने बंद किए अश्विन-जड़ेजा के लिए वनडे टीम के दरवाजे
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अश्विन और जडेजा
- फोटो : twitter
अब सवाल ये उठता है कि चयनकर्ता साफ तौर पर इन दोनों खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने की बात सीधे तौर पर मानने से क्यों इंकार कर रहे हैं? वो ये क्यों नहीं कहते कि ये दोनों टेस्ट में बेस्ट हैं लेकिन वनडे में टीम इनकी जगह नहीं बनती। दोनों की गेंदबाजी टीम के लिए परेशानी का सबब साबित हो रही है। जी हां! ये सही बात है दोनों खिलाड़ियों का वनडे मैचों में 2015 के विश्वकप के बाद बेहद खराब प्रदर्शन रहा है। जब-जब युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल होने का मौका मिला है उन सभी ने अश्विन और जडेजा की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।
विराट नहीं इन खिलाड़ियों ने बंद किए अश्विन-जड़ेजा के लिए वनडे टीम के दरवाजे
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रविचंद्रन अश्विन
- फोटो : ESPN
सबसे पहले रविचंद्रन अश्विन के साल 2015 विश्वकप के बाद से अब तक के प्रदर्शन पर नजर डालते हैं। तब से अब तक अश्विन ने 15 वनडे मैच खेले हैं। जिसमें उन्होंने 40.58 की औसत से 17 विकेट हासिल किए हैं। वहीं उनका स्ट्राइक रेट 40.58 का है मतलब वो हर 46वीं गेंद में विकेट हासिल करते हैं। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 3/28 रन का रहा। ऐसे में कुल मिलाकर उनके इस प्रदर्शन को औसत ही कहा जा सकता है। ऐसा प्रदर्शन कभी मैच जिताऊ नहीं हो सकता।
विराट नहीं इन खिलाड़ियों ने बंद किए अश्विन-जड़ेजा के लिए वनडे टीम के दरवाजे
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रविंद्र जडेजा
- फोटो : ESPN
वहीं रविंद्र जडेजा की बात करें तो उनकी कहानी तो अश्विन से भी परे हैं। 2015 विश्वकप के बाद जडेजा ने 17 वनडे मैचों में शिरकत की है, जिसमें उन्होंने 67.83 की औसत से महज 12 विकेट हासिल किए हैं। इन मैचों में उनके नाम प्रति मैच औसतन 1 विकेट भी नहीं है। उनका स्ट्राइक रेट भी 77.5 का है। इसका मतलब वो प्रत्येक 78वीं गेंद में विकेट लेते हैं। जबकि मैच में उन्हें 60 गेंद फेंकने का ही मौका मिलता है। भले ही वो एक अच्छे फील्डर और काम चलाऊ बल्लेबाज हैं। लेकिन यदि वो अपने प्राइमरी काम में सफल नहीं होंगे तो टीम पर बोझ ही साबित होंगे। इस तरह की गेंदबाजी से वो अकेले दम पर मैच का पासा नहीं पलट पाएंगे।
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अक्षर पटेल
- फोटो : getty
वहीं अश्विन और जडेजा की अनुपस्थिति में जिन युवा गेंदबाजों को मौका मिला उन्होंने इन दोनों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया जिसके कारण अब चयनकर्ताओं को पिछले रास्ते से ही इन्हें टीम से बाहर करने का निर्णय लेना पड़ा। अक्षर पटेल इनकी अनुपस्थिति में सबसे सफल स्पिनर साबित हुए हैं। अक्षर ने 21 मैच की 21 पारियों में 32.44 की औसत से 25 विकेट हासिल किए हैं। हालांकि उनका स्ट्राइक रेट अश्विन के तकरीबन बराबर( 45.6) है। लेकिन वह जडेजा से कई कदम आगे दिख रहे हैं।