पूत के पैर पालने में ही दिख जाते हैं। 18 बरस के सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने स्कूली क्रिकेट में धमाल किया। रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी में सेंचुरी जड़ कर आगाज करने और अपनी कप्तानी में इसी साल भारत को अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप खिताब जिता कर पृथ्वी ने अपनी प्रतिभा दिखाई। पृथ्वी ने भारत ए के लिए दस मैचों में चार सेंचुरी, दो हाफ सेंचुरी सहित साढ़े सात सौ से ज्यादा बनाए।
पृथ्वी शॉ इनसे सीखे थे क्रिकेट का ककहरा, अब इंग्लैंड के खिलाफ धूम मचाने को तैयार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पृथ्वी के बहुत कम उम्र में बल्ले से बहुतेरे कारनामे सचिन तेंदुलकर के से हैं। क्रिकेट के कई पारखी इसीलिए पृथ्वी की तुलना तेंडुलकर से करते है। मुरली विजय की इंग्लैंड के मौजूदा दौरे में नाकामी के बाद भारत के लिए बढिया बल्लेबाजी का सिला पृथ्वी शॉ को मिला। पृथ्वी को बतौर ओपनर मौजूदा पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के बाकी दो अंतिम टेस्ट मैचों के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है।
पृथ्वी शॉ को क्रिकेट का ककहरा सिखाने वाले उनके क्रिकेट उस्ताद राजू पाठक ने भारत की टेस्ट टीम के लिए बुलावे पर 'अमर उजाला' से कहा, 'पृथ्वी शॉ अब टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार हैं। उन्हें मौजूदा शिविर के आगामी दो टेस्ट मैचों में टीम इंडिया की अंतिम एकादश में मौका मिला तो वह जरूर कामयाब रहेंगे। भारत ए के लिए लगातार बढिया प्रदर्शन करने और रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी के कारण वह टेस्ट क्रिकेट के लिए खुद को जेहनी तौर पर भी तैयार कर चुके हैं। इंग्लैंड में क्रिकेट में कामयाबी के लिए वहां के मौसम में स्विंग गेंदबाजी और गेंद के मूवमेंट को खेलने की कूवत बल्लेबाज में होनी चाहिए और यह पृथ्वी में है। मैंने उनसे बस यही कहा है कि वे अपने नेचुरल खेल पर ही फोकस करें और स्विंग को खेलते वक्त कुछ ज्यादा फोकस रहें।'
वह बताते हैं, 'पृथ्वी के लिए इंग्लैंड का मौसम नया नहीं है। पृथ्वी जब 12 बरस के थे तो तब वह इंग्लैंड के दौरे पर गए और करीब चार महीने तक इंग्लैंड में खेले। पृथ्वी इसके बाद भी बतौर नौजवान बल्लेबाज इंग्लैंड में खेल चुके हैं। पृथ्वी बहुत कम उम्र में यह जान गए थे कि इंग्लैंड में कामयाब होने के लिए बल्लेबाज को स्विंग को खेलना आना चाहिए। पृथ्वी को इंग्लैंड में बतौर कामयाब होने के लिए मेरी बतौर क्रिकेट गुरु सलाह यही है वे नई गेंद पर स्विंग और मूवमेंट की थाह लेने के बाद अपने स्ट्रोक खेलें। पूरी उम्मीद है कि पृथ्वी इंग्लैंड में मेरी नसीहत को तवज्जो देंगे।'
राजू पाठक बताते हैं, 'पृथ्वी के लिए अच्छी बात यह है कि उनकी अच्छी बल्लेबाजी को देखते हुए चयनकर्ताओं ने आखिरी दो टेस्ट मैचों के लिए भारतीय टीम में शामिल किया है। अब उम्मीदों की कसौटी पर खरा उतरने की बारी पृथ्वी की है। स्विंग गेंदबाजी को खेलने के लिए पारंगत होने में अनुभव एक बड़ी भूमिका निभाता है। पृथ्वी जितना ज्यादा इंग्लैंड में टीम इंडिया के लिए खेलेंगे उनकी बल्लेबाजी में उतना ही ज्यादा निखार आएगा। इंग्लैंड में पहले टेस्ट में भारत खासे करीबी मैच में बहुत कम अंतर से हारा। सीरीज के दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम इंग्लैंड के मौसम से तालमेल बैठाने में नाकाम रहने के कारण हारी।'