विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने बुधवार को क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि पूर्व भारतीय दिग्गज अनिल कुंबले के साथ उनके पहले टेस्ट कप्तान सौरव गांगुली सही मायनों में नेतृत्वकर्ता थे। पार्थिव ने कहा, क्रिकेट के अलावा जिंदगी में भी उनपर इन दोनों खिलाड़ियों का काफी प्रभाव रहा है।
संन्यास के बाद भावुक हुए पार्थिव पटेल, धोनी नहीं इन्हें बताया महान कप्तान
35 वर्षीय पार्थिव ने 18 साल के अपने क्रिकेट करियर को अलविदा करते हुए कहा कि गुजरात के लिए घरेलू क्रिकेट के लगभग सभी खिताब के अलावा तीन बार आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) चैम्पियन बनने के बाद आगे बढ़ने का यह सही समय है। पार्थिव ने चुनिंदा पत्रकारों के साथ ऑनलाइन संवादाता सम्मेलन में कहा, 'लोगों के प्रबंधन कौशल के मामले में मैं हमेशा सौरव गांगुली को सही मायने में नेतृत्वकर्ता मानता हूं। सौरव और अनिल महान कप्तान थे। मैं आज जो हूं उसे बनाने में उनका काफी योगदान है।'
उन्होंने कहा, 'मेरे पास अभी भी पहले टेस्ट मैच की टोपी है जिसे दादा (गांगुली) ने मुझे दिया था। हेडिंग्ले (2002) और एडीलेड (2003-04) में टेस्ट जीत और रावलपिंडी में पारी का आगाज करते हुए अर्धशतक लगाना मेरे लिए सबसे यादगार लम्हें है।'उन्होंने कहा कि वह पिछले एक साल से संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे लेकिन यह सबसे बेहतर समय है। उन्होंने कहा, 'इस फैसले के बाद मुझे शांति की अनुभूति हुई और मैं ठीक से नींद ले पाया। मेरे परिवार के सदस्यों की आंखे हालांकि नम थी। मैं एक साल से इस पर विचार कर रहा था और 18 साल के बाद शायद ही कुछ और हासिल करने के लिए बचा था।'
पार्थिव ने कहा, 'मैंने सभी घरेलू टूर्नामेंट जीते हैं। इसमें तीन आईपीएल ट्रॉफी भी है। मुझे लगता है गुजरात क्रिकेट सही जगह है।' महेंद्र सिंह धोनी के युग में विकेटकीपर के तौर पर खेलना एक आसान काम नहीं था, लेकिन पार्थिव ने खेल के प्रति अपने जज्बे से गुजरात जैसे राज्य को घरेलू क्रिकेट की मजबूत टीम बनाने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, 'भारतीय टीम 2009 में न्यूजीलैंड दौरे पर गई थी। मैंने उससे पहले रणजी ट्रॉफी में 800 रन बनाए थे और दलीप ट्रॉफी के फाइनल में शतक बनाया था। मुझे राष्ट्रीय टीम में तब जगह नहीं मिली। मुझे लगा करियर खत्म हो गया। लेकिन फिर मैंने कुछ और सोचा और यह एक टीम को खड़ा करने का फैसला था।'