46 दिनों तक चला क्रिकेट वर्ल्ड कप का सफर रविवार को थम गया। लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड पहली बार विश्व कप का खिताब जीतने में सफल रहा।
न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला गया मुकाबला टाई रहा जिसके बाद वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार सुपर ओवर खेला गया। हालांकि सुपर ओवर भी टाई रहा और फिर ICC के नियम के तहत मैच में सबसे अधिक बाउंड्रीज लगानी वाली इंग्लैंड टीम को जीत दे दी गई।
इसी के साथ जहां न्यूजीलैंड का पहली बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट गया वहीं मेजबान इंग्लैंड के लिए ये सपना सच हो गया।
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न्यूजीलैंड क्रिकेट
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केन विलियमसन की अगुवाई वाली कीवी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंकाया। बावजूद इसके वे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वर्ल्ड कप चैंपियन बनने से चूक गई। इसी के साथ कीवी टीम को वर्ल्ड कप फाइनल में लगातार दूसरी हार नसीब हुई और वे एक अनचाहे रिकॉर्ड के साथ दुर्भाग्यशाली टीमों के खास समूह में शामिल हो गई।
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इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड
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दरअसल, कीवी टीम लगातार वर्ल्ड कप का दूसरा फाइनल हारने के साथ उन दुर्भाग्यशाली टीमों के खास समूह में शामिल हो गई जिसे लगातार दो बार वर्ल्ड कप के फाइनल में हार मिली। इससे पहले इंग्लैंड और श्रीलंका के साथ भी ऐसा हो चुका है।
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इंग्लैंड क्रिकेट टीम
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इंग्लैंड की टीम 1987 और 1992 के वर्ल्ड कप में उपविजेता रही थी। उसे 1987 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने जबकि पाकिस्तान ने 1992 में 22 रनों से हराकर खिताब हासिल किया था।
इसके बाद श्रीलंका को लगातार दो बार उपविजेता बनना पड़ा था। 2007 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों और 2011 में भारत से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।