मोहम्मद शमी टीम इंडिया की तेज गेंदबाजी आक्रमण के खास हथियार हैं। आज उन्होंने अपने जीवन के 26 साल पूरे कर लिए और 27वें बसंत में प्रवेश कर लिया है। शमी आज बड़े खिलाड़ी बन गए हैं लेकिन कभी उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत कब्रिस्तान पर खेल कर की थी।
कब्रिस्तान पर खेलते हुए टीम इंडिया में जगह बनाई थी शमी ने
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मोहम्मद शमी
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तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी रहने वाले उत्तर प्रदेश के हैं लेकिन बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते हुए टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई, फिर पहचान। लेकिन उनके करियर की खास बात यह है कि उन्होंने क्रबिस्तान पर खेलते हुए अपने खेल को निखारा और आगे बढ़े।
कब्रिस्तान पर खेलते हुए टीम इंडिया में जगह बनाई थी शमी ने
यूपी के अमरोहा में जन्में मोहम्मद शमी के पिता तौसीफ अहमद भी क्रिकेट के बड़े दीवाने हैं। अपने बेटे की तरह वह भी तेज गेंदबाज रहे हैं लेकिन वह सिर्फ अपने गांव की क्रिकेट टीम के लिए ही खेल सके और आगे नहीं जा पाए। खास बात यह है उनके परिवार में 3 भाई हैं जो खुद तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। इन तीनों के अलावा एक बहन भी है।
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2005 में मोहम्मद शमी जब 15 साल के थे तब पिता तौसीफ अहमद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना, फिर उसे और तराशने के लिए मुरादाबाद जो उनके गांव से 22 किमी दूर है ले गए। वहां उन्होंने क्रिकेट कोच बदरुद्दीन सिद्दकी के पास शमी को और तैयार करने के लिए छोड़ दिया। इस बीच वह उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम में जगह नहीं बना पाए तो कोच 2005 के अंत में कोलकाता ले गए। फिर इसके बाद उन्होंने छोटे-छोटे क्लब के लिए खेलते हुए बंगाल की टीम में जगह बना ली।
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होश संभालते ही क्रिकेट की गेंद थामने वाले शमी ने क्रिकेट का ककहरा कब्रिस्तान पर खेलते हुए सीखा जो उनके गांव के पास बना हुआ है। इस कब्रिस्तान पर आज भी क्रिकेट खेला जाता है। अभ्यास के लिए मोहम्मद शमी ने इसी कब्रिस्तान पर सीमेंट की पिच बनवाई और उसी पर तेज गेंदबाजी करके टीम इंडिया में जगह बनाई।