भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन इन दिनों क्रिकेट फील्ड से दूर परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। हालांकि, मैदान से दूर उनका एक और प्रोफेशन जोर शोर से जारी है। अश्विन क्रिकेटर बनने से पहले एक इंजीनियर रह चुके हैं। इसके अलावा वह फिलहाल एक लोकप्रिय यूट्यूबर और एक लेखक भी हैं। एक बार में कई चीजों को आसानी से मैनेज करने के सवाल पर अश्विन ने कहा कि जीवन हो या क्रिकेट वह अति सुरक्षात्मक रवैया अपनाने की जगह असफल होना पसंद करते हैं। 37 साल के अश्विन को को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे चतुर दिमाग वाले क्रिकेटर के तौर पर जाना जाता है। टेस्ट में 516 विकेट लेने वाले इस खिलाड़ी की बातों और विचारों को क्रिकेट जगत में काफी तवज्जो दी जाती है।
वह इस समय अपनी पुस्तक ‘आई हैव द स्ट्रीट्स: ए कुट्टी क्रिकेट स्टोरी’ की सफलता का लुत्फ उठा रहे हैं। इस किताब के सह-लेखक सिद्धार्थ मोंगा है और इसे पेंगुइन रैंडम हाउस ने प्रकाशित किया है। यह किताब में 2011 तक अश्विन के जीवन का विवरण उनके दिमाग की झलक देती है। अश्विन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मैं अपनी जिंदगी जी रहा हूं, बस यह इतना ही है। मैं 'ए', 'बी' या 'सी' ( किसी लक्ष्य) को पूरा करने के बारे में नहीं सोच रहा हूं। मैं मौजूदा समय में रहना पसंद करता हूं। मैं आम तौर पर एक रचनात्मक व्यक्ति हूं और अगर मुझे लगता है कि मैं कुछ करना चाहता हूं, तो मैं आगे बढ़ूंगा और करूंगा। (चाहे यह) सही हो या गलत, यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में मैं बाद में फैसला करना चाहूंगा।'
हालांकि, अश्विन हमेशा इस तरह से बेखौफ नहीं थे। बचपन में उनके अंदर असुरक्षा की भावना थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, वह इससे आगे निकलने में सफल रहे। उन्हें अहसास हुआ कि उनका डर उनके साथ खेल खेल रहा है। अश्विन ने कहा कि इससे निपटने के बाद वह कुछ हद तक अडिग हो गए और यह एक क्रिकेटर के रूप में उनके विकास में कारगर रहा। इसने उन्हें एक बच्चे के रूप में चेन्नई की सड़कों पर कैरम बॉल फेंकने से लेकर भारत के प्रमुख स्पिनर के रूप में उनका कायापलट काफी मदद की।
इस खिलाड़ी ने अपनी आलोचनाओं को गंभीरता से लिया है और ढेर सारे विकेट लेकर इसका जवाब दिया है। हालांकि, उन्होंने ‘बाहरी शोर’ को अपने दिमाग में हावी नहीं होने दिया। उनके अंदर का इंजीनियर उन्हें जोखिम लेने और विफलता से निडर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, 'मैं बिल्कुल भी असुरक्षित नहीं हूं। मैं पूरी तरह से सुरक्षित रहने के बजाय जीवन में असफल होना पसंद करूंगा। यही मेरा चरित्र है। मेरे अंदर लोगों जैसी सामान्य असुरक्षा की भावना नहीं हैं।'
अश्विन इन बातों को उसी साफगोई से कहते हैं जिसके साथ वह जटिल क्रिकेट कानूनों को ‘डिकोड’ करते हैं। उनकी इन चीजों के सोशल मीडिया पर वायरल होने में देर नहीं लगती। उन्होंने कहा, 'बचपन में अपनी असुरक्षा वाली मानसिकता को पीछे छोड़ने के बाद मेरी सोच बदल गयी थी। मैं किसी और की असुरक्षा का फायदा उठाने के बारे में नहीं सोचता हूं। इसी तरह मैं क्रिकेट या जीवन को सामान्य रूप से देखता हूं।'