भारतीय क्रिकेट को लोकप्रियता के चरम पर पहुंचाने के मामले में कपिल देव का अहम योगदान माना जाता है। साल 1983 के विश्व कप में कपिल ने एक ऐसी पारी खेली थी जिसने टीम इंडिया के टेंशन को दूर कर दिया और कुछ दिन बाद इसी टीम ने इतिहास ही रच दिया।
कपिल देव ने मैदान पर उस समय धमाकेदार पारी खेली थी जब टी-20 क्रिकेट का कोई नॉमोनिशान ही नहीं था और वनडे में भी 4 रन के औसत की बल्लेबाजी को भी तेज माना जाता था। उस समय कपिल ने मैदान के चारो ओर चौकों-छक्कों की बारिश कर दी थी और अकेले अपने दम पर विपक्षी टीम को हरा दिया था। क्रिस गेल से 3 दशक पहले ही कपिल ने उनकी जैसी विस्फोटक पारी खेली थी।
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कपिल देव कैच
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कपिल देव के दम पर भारत यह मैच इसलिए जीता था क्योंकि उन्होंने इस मैच में टीम इंडिया की ओर से बनाए रन में 66 फीसदी योगदान अपने बल्ले से दिया था। और वह भी तब जब वह बल्लेबाजी करने आए तो टीम के 5 विकेट महज 17 रन पर गिर गए थे।
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sunil gavaskar and kapil dev
वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने से पहले भारतीय टीम खिताब की प्रबल दावेदार नहीं थी। लीग चरण में जिम्बाब्वे के खिलाफ उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी और उसके 4 विकेट 9 रन पर ही गिर गए थे। टीम गहरे संकट में थी क्योंकि इतने खराब प्रदर्शन से भारत पर हार का संकट दिख रहा था।
इंग्लैंड के टनब्रिज वेल्स के नेविल ग्राउंड में 18 जून 1983 को वर्ल्ड कप के लीग चरण में भारत और जिम्बाब्वे के बीच मुकाबला खेला जा रहा था। जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने गजब की शुरुआत की और 9 रन पर ही भारत के 4 विकेट झटक लिए, फिर 17 रन पर उसका एक और विकेट गिर गया। टीम इंडिया पर पूरे ओवर भी खेल पाने का संकट मंडराने लगा।