पिछले हफ्ते दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार डे-नाइट टेस्ट खेला गया। भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया सीरीज का तीसरा टेस्ट महज दो दिन में समाप्त हो गया। गुलाबी गेंद से खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड की टीम दोनों पारियों में मिलाकर सिर्फ 193 रन ही बना पाई। वहीं भारतीय टीम भी पहली पारी में 145 रन पर ढेर हो गई। बावजूद इसके टीम इंडिया ने मैच को दस विकेट से जीत लिया। लेकिन मैच खत्म होने के बाद इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटरों ने पिच को दोष देना शुरू कर दिया और उसकी जमकर आलोचना की।
चौथे टेस्ट में कैसी होगी नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच, क्या फिर होगी गेंद टर्न, जानें सबकुछ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठोस पिच के साथ होगी उछाल
मामले की जानकारी रखने वाले बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘अच्छी पिच की उम्मीद है जो ठोस रहेगी और समान उछाल मिलेगा। यह बल्लेबाजी के अनुकूल होगी और यह पारंपरिक लाल गेंद का टेस्ट मैच होगा इसलिए यहां चार से आठ मार्च तक होने वाले मुकाबले में काफी बड़े स्कोर की उम्मीद की जा सकती है।’
नए स्थल पर एक और टर्निंग पिच से हो सकती है मुश्किल
बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों के साथ टीम प्रबंधन भी समझता है कि धूल से भरी एक और पिच नए स्थल के लिए अच्छी नहीं होगी जिसके आईपीएल और आईसीसी टी-20 विश्व कप के दौरान कई महत्वपूर्ण मैचों की मेजबानी करने की संभावना है।
पिच नहीं गुलाबी गेंद से हुई दिक्कतें
तीसरे टेस्ट में गेंद गुलाबी थी जो पिच पर पड़ने के बाद तेजी से निकल रही थी और बल्लेबाजों ने विकेट सीधी गेंदों पर भी गंवाए हैं। इंग्लैंड के कई पूर्व क्रिकेटर भी यह बात कह चुके हैं। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने इस दोहराते हुए कहा, 'गुलाबी गेंद का टेस्ट अच्छा रहा क्योंकि यह गेंद से अधिक जुड़ा हुआ मामला था। गेंद पिच पर गिरकर तेजी से आ रही थी जबकि पिच में कोई समस्या नहीं थी जैसा इंग्लैंड के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ी कह रहे हैं। वे सीधी गेंदों का सामना करने में नाकाम रहे। लेकिन इस तरह की पिचें अपने ऊपर भी भारी पड़ सकती हैं और बीसीसीआई को इसकी अच्छी तरह जानकारी है।’
भारत सीरीज में आगे
भारत चार टेस्ट की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा है और जून (18-22) में लॉर्ड्स में होने वाले आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में क्वालिफाई करने के लिए उसे अंतिम टेस्ट को सिर्फ ड्रॉ कराना होगा। भारतीय टीम 3-1 के फैसले से खुश होगी लेकिन उसे नतीजा देने वाली टर्निंग पिच की जरूरत नहीं है।