कहते हैं कि पूत के पैर पालने में ही दिख जाते हैं और अगर इरादे हो मजबूत तो उम्र से भला क्या ताल्लुक। जी हां, हम बात कर रहे हैं 19 वर्षीय पृथ्वी शॉ के बारे में, जो शुक्रवार को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। दअसल, शॉ ने 14 साल की उम्र में ही स्कूली क्रिकेट में धमाल मचाकर सुर्खियां बटोरी थीं।
पृथ्वी पहली बार 14 साल की उम्र में साल 2013 में सुर्खियों में आए। उस समय उन्होंने रिजवी स्कूल की तरफ से खेलते हुए अंडर-16 स्कूल टूर्नामेंट में 300 गेंदों में 546 रन बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया।
बता दें कि शॉ का बचपन उनका काफी संघर्ष में बीता है। वह प्रैक्टिस करने के लिए रोजाना 2 घंटे का सफर तय करके मुंबई में विरार से चर्चगेट तक जाते थे। क्रिकेट अभ्यास छोड़ना उनके लिए किसी पाप से कम नहीं था। कुल मिलाकर शॉ का प्रदर्शन शुरू से ही शानदार रहा, जिसका नतीजा है कि उन्हें टीम इंडिया में मौका मिला।
वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इस युवा बल्लेबाज का सिलेक्शन किया गया और पहले ही मैच में उन्होंने जबरदस्त कमाल दिखाया। वह टीम इंडिया की तरफ से टेस्ट में पदार्पण करने वाले 293वें खिलाड़ी बने। पृथ्वी शॉ को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह अपना पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। हां, ऐसा होगा भी क्यों ? जो खिलाड़ी अपने रणजी डेब्यू में शतक, दलिप ट्रॉफी डेब्यू में शतक जमा चुका हो। वह तो आत्मविश्वास से भरा होगा ही। वेस्टइंडीज के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे शॉ काफी उत्साहित, खुशी से लबरेज, चेहरे की खिलखिलाहट और आत्मविश्वास से परिपूर्ण लग रहे थे।
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सचिन तेंदुलकर और पृथ्वी शॉ
डेब्यू मैच में उन्होंने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 'क्रिकेट के भगवान' माने जाने वाले टीम इंडिया के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी को भी इस मायने में पीछे छोड़ दिया। दरअसल, पृथ्वी शॉ सचिन तेंदुलकर के बाद सबसे कम उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं। मगर तेंदुलकर ने अपने डेब्यू मैच में पाकिस्तान के खिलाफ सर्फ 15 रन बनाए थे और शॉ ने 134 रन की बेहतरीन पारी खेली। उन्होंने 154 गेंदों में 19 चौकों की मदद से 134 रन की धामकेदार खेली। अब यह युवा बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया दौरे की तैयारियों में जुटा हुआ है।