भारतीय टीम विराट कोहली की कप्तानी मेें 8वीं चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेने इंग्लैंड पहुंची है। विराट ने कहा है कि टीम इंडिया पिछली बार खिताब जीतने वाली टीम से ज्यादा मजबूत है। पिछली बार टीम में युवा खिलाड़ी थे उनमें से अधिकांश वही हैं लेकिन पिछले चार साल में ये खिलाड़ी अनुभवी हो गए हैं। उनके इसी अनुभव और परिपक्वता का फायदा भारतीय टीम को मिलेगा। लेकिन इससे पहले भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी में कहां तक और किस तरह सफर पूरा किया आईए उसपर नज़र डालते हैं...
चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक ऐसा रहा है टीम इंडिया का सफर
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चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक ऐसा रहा है टीम इंडिया का सफर
1998 ढाका
चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत साल 1998 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई था। नॉक आउट स्पर्धा के रूप में खेली गई पहली चैंपियंस ट्रॉफी में भारत ने अपने पहले मैच में सचिन तेंदुलकर के शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया को मात दी थी। सचिन ने उस मैच में 128 गेंदों पर शानदार 141 रन बनाए थे इसके अलावा 38 रन देकर 4 विकेट भी चटकाए थे। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था।
चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक ऐसा रहा है टीम इंडिया का सफर
कीनिया 2000
पहले संस्करण में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाली टीम इंडिया के लिए दूसरा संस्करण भी बेहद शानदार रहा। कीनिया की राजधानी नैरोबी में खेले गए दूसरे संस्करण में सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। फाइनल में न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को मात दी। इससे पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को मात दी थी।
दुनिया ने पहली बार युवराज और जहीर खान की झलक इसी प्रतियोगिता में देखी थी। युवराज सिंह की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 84 रनों की नाबाद पारी ने चैंपियंस ट्रॉफी को यादगार बना दिया था। इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने भारतीय पारी की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कप्तान सौरव गांगुली की 141 रन की शानदार शतकीय पारी की बदौलत भारत ने 95 रन से जीत हासिल की थी। गांगुली के बाद गेंदबाजी में बाकी का काम जहीर खान ने कर दिया। फाइनल में भी सौरव गांगुली का बल्ला चला। गांगुली की 117 रन की शतकीय पारी की बदौलत टीम इंडिया ने कीवी टीम के सामने जीत के लिए
चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक ऐसा रहा है टीम इंडिया का सफर
साल 2002 में श्रीलंका में एक बार फिर भारत को फाइनल में पहुंचने का मौका मिला। बारिश से प्रभावित फाइनल के कारण श्रीलंका-भारत को संयुक्त विजेता घोषित किया गया था। 2003 के विश्वकप से 5 महीने पहले आयोजित इस प्रतियोगिता से पहले सभी टीमों के पास अपने को आजमाने का ये सुनहरा मौका था। इससे पहले भारतीय टीम नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में इंग्लैंड को मात देकर आत्मविश्वास से लबरेज थी। भारत ने इस बार अपने अभियान की शुरुआत जिंबाब्वे के खिलाफ की। 87 रन पर पांच विकेट गंवाने के बाद टीम इंडिया को मोहम्मद कैफ ने शानदार शतक(111) जड़कर टीम इंडिया को मैच में वापस लाए। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी जिंबाब्वे एंडी फ्लावर के 145 रन की शानदार पारी के बावजूद टीम इंडिया को मात नहीं दे पाई।
इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ दुनिया ने सौरव और सहवाग की आतिशी बल्लेबाजी का नमूना देखा। इंग्लैंड के 269 के स्कोर का पीछा करने उतरी टीम इंडिया के आरंभिक बल्लेबाजों सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग ने इंग्लिश गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए। सहवाग ने नाबाद 117 और सौरव गांगुली ने 126 रन बनाए। टीम इंडिया मे 39.3 ओवर में ही 270 रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया।
सेमीफाइलन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत सहवाग(59) और युवराज(62) की अर्धशतकीय पारियों की बदौलत 261 रन का स्कोर खड़ा किया। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका ने एक समय हर्शल गिब्स(117) की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत 1 विकेट पर 192 रन बना लिए थे। लेकिन युवराज सिंह ने हर्शल गिब्स का शानदार कैच पकड़कर मैच का पांसा पूरी तरह पलट दिया। अंत में अफ्रीकी टीम 5 विकेट पर केवल 247 रन बना सकी। सहवाग ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट हासिल किए।
चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक ऐसा रहा है टीम इंडिया का सफर
साल 2004, इंग्लैंड और वेल्स
साल 2004 में इंग्लैंड में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी भारत के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुई। 2003 के विश्वकप में उपविजेता रही टीम इंडिया से आशा की जा रही थी कि टीम इंडिया एक बार फिर इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचेगी। कीनिया के खिलाफ पहले मैच में भारत ने कप्तान सौरव गांगुली की शानदार 90 रन की पारी की बदौलत जीत हासिल की। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम महज 200 रन पर ढेर हो गई।
राहुल द्रविड़ ने भारत की तरफ से सर्वाधिक 67 रन बनाए। इस पारी के दौरान पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के साथ उनकी कई बार झड़प हुई। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। इरफान पठान ने 27 रन पर पाकिस्तान के तीन बल्लेबाजों को पवेलियन वापस भेज दिया। लेकिन इसके बाद यूसुफ योहाना(81) और इंजमाम उल हक(49) की शानदार बल्लेबाजी की और आखिरी ओवर में भारत को मात दी। इसी के साथ भारत का विजय रथ रुक गया।