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भारत vs श्रीलंका: यशस्वी-वैभव सूर्यवंशी पर बरसे संजय मांजरेकर; ICC-BCCI से क्यों की सख्त से सख्त सजा की मांग?
Wed, 26 Aug 2026 01:34 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:34 PM IST
सार
पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी के हालिया विवादों को लेकर आईसीसी और बीसीसीआई से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ जुर्माना या चेतावनी से खिलाड़ियों के व्यवहार में सुधार नहीं होगा और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सजा जरूरी है।
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वैभव और यशस्वी
- फोटो : ANI/IANS
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विस्तार
भारत के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। मांजरेकर की यह मांग दोनों के हालिया विवादों के बाद आई है। वैभव ने हाल ही में श्रीलंका ए के खिलाफ आउट होने के बाद एक खिलाड़ी को धक्का दिया था। वहीं, यशस्वी जायसवाल श्रीलंका के खिलाफ मौजूदा सीरीज के कोलंबो टेस्ट में आउट होने के बाद असिथा फर्नांडो से भिड़ गए थे। इस दौरान उनका हेल्मेट असिथा के सिर से टकराया था। मांजरेकर ने कहा कि सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देने से आदत नहीं सुधरेगी और यह खिलाड़ियों को ऐसी हरकतें दोहराने के लिए प्रेरित करेगा।
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मांजरेकर ने घटनाओं पर क्या कहा?
मांजरेकर का मानना है कि ये हरकतें कई बार हो चुकी हैं और सख्त सजा न देने पर आगे भी होंगी। उन्होंने सूर्यवंशी की लड़ाई को यशस्वी की लड़ाई से जोड़ते हुए सिर्फ जुर्माना देकर छोड़ देने पर सवाल उठाए। मांजरेकर ने अपने एक्स अकाउंट पर आईसीसी और बीसीसीआई को टैग कर पोस्ट करते हुए कहा, 'वैभव जब भारत-ए से खेल रहे थे और अब यशस्वी, अगर आप इसी तरह से इन हरकतों को जाने देते रहेंगे तो यह घटनाएं होती रहेंगी। आप उन्हें बार-बार ऐसा करने के लिए ट्रेन कर रहे हैं। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है और न ही खिलाड़ियों के भविष्य के लिए।'
मांजरेकर का मानना है कि ये हरकतें कई बार हो चुकी हैं और सख्त सजा न देने पर आगे भी होंगी। उन्होंने सूर्यवंशी की लड़ाई को यशस्वी की लड़ाई से जोड़ते हुए सिर्फ जुर्माना देकर छोड़ देने पर सवाल उठाए। मांजरेकर ने अपने एक्स अकाउंट पर आईसीसी और बीसीसीआई को टैग कर पोस्ट करते हुए कहा, 'वैभव जब भारत-ए से खेल रहे थे और अब यशस्वी, अगर आप इसी तरह से इन हरकतों को जाने देते रहेंगे तो यह घटनाएं होती रहेंगी। आप उन्हें बार-बार ऐसा करने के लिए ट्रेन कर रहे हैं। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है और न ही खिलाड़ियों के भविष्य के लिए।'
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संजय मांजरेकर
- फोटो : BCCI
क्या है यशस्वी का मामला?
- यह घटना कोलंबो टेस्ट के पहले दिन भारतीय पारी के 17वें ओवर में हुई थी।
- फर्नांडो ने एक तेज अंदर आती गेंद पर जायसवाल को बोल्ड कर दिया था।
- इसके बाद जब भारतीय बल्लेबाज पवेलियन की ओर लौट रहे थे, तो ऐसा लगा कि उन्होंने गेंदबाज की कोई बात सुनी।
- जायसवाल इसके बाद वापस मुड़े और फर्नांडो से भिड़ गए। दोनों के बीच तीखी बहस हुई और इसी दौरान दोनों के सिर आपस में टकरा गए।
- हालांकि, श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने तुरंत बीच में आकर दोनों को अलग कर दिया।
यशस्वी-असिथा पर लगा था जुर्माना
- यशस्वी और असिथा, दोनों पर आईसीसी आचार संहिता के लेवल एक के उल्लंघन के लिए उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा दोनों खिलाड़ियों को एक-एक डिमेरिट अंक भी दिया गया।
- आईसीसी के मुताबिक दोनों ने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए बनाए गए आचार संहिता के अनुच्छेद 2.12 का उल्लंघन किया, जो किसी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी या अन्य व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से जुड़ा है।
यशस्वी और असिथा भिड़े
- फोटो : Twitter
भोगले, जडेजा और कोटक भी कर चुके आलोचना
- यशस्वी की इस हरकत पर उन्हें दुनिया भर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कहा कि यशस्वी के लिए सबसे अच्छा यही होता कि वह बस वहां से चले जाते। भोगले ने कहा, 'मैं जायसवाल से बस इतना कहना चाहता हूं कि हां, हो सकता है जो कहा गया, वह नहीं कहा जाना चाहिए था। लेकिन जैसा आप देते हैं, वैसा आपको लेना भी होगा। सबसे आसान रास्ता बस वहां से चले जाना है।'
- इस मामले पर अजय जडेजा का भी बयान सामने आया था। उन्होंने कहा कि मैदान पर मजाक और स्लेजिंग तब तक ठीक है, जब तक भाषा और व्यवहार की सीमा न लांघी जाए। जडेजा ने कहा, 'जब यशस्वी फील्डिंग कर रहे थे और उन्होंने निरोशन डिकवेला से कुछ कहा था। तब हमने कहा था कि मैदान पर मजाकिया नोकझोंक अच्छी है, जब तक आपकी भाषा में कुछ गलत न हो। अगर कोई व्यक्ति खुद पर हंस नहीं सकता, तो उसे दूसरों पर भी नहीं हंसना चाहिए। अगर आप किसी बात को खुद पर नहीं ले सकते, तो मैदान पर वह बात दूसरों से भी नहीं कहनी चाहिए।'
- भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने कहा था, 'मुझे लगता है कि श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने यशस्वी से कुछ कहा होगा और यह सब मैच की गर्मी में हुआ होगा। जाहिर तौर पर, मुझे नहीं लगता कि जायसवाल को फर्नांडो के इतने करीब जाना चाहिए था, लेकिन हीट ऑफ द मोमेंट में ऐसा हो जाता है।'
क्या था वैभव का मामला?
- इसी साल भारतीय-ए टीम श्रीलंका-ए और अफगानिस्तान-ए के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के लिए श्रीलंका के दौरे पर गई थी।
- इसी सीरीज के चौथे मुकाबले में मैच टाई हुआ और फिर सुपरओवर से फैसला आया। सुपरओवर के बाद श्रीलंका ए के खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे और वैभव सूर्यवंशी के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों आपस में भिड़ते दिखे थे।
- यह मामला सुपर ओवर के आखिरी गेंद फेंके जाने के बाद हुई जब कुगाथस माथुलन ने वैभव को गेंद डाली।
- भारत ए को उस समय आखिरी गेंद पर आठ रन की जरूरत थी।
- माथुलन ने शानदार यार्कर डाली जिस पर वैभव शॉट नहीं खेल पाए। इसके बाद वह जश्न मनाने लगे और श्रीलंका ए के खिलाड़ी भी इसमें शामिल हो गए।
- हलाम्बागे पर सुपर ओवर में जीत के बाद भारतीय बल्लेबाजों के प्रति उकसावे वाली टिप्पणी करने के लिए कार्रवाई की गई जिससे 15 साल के भारतीय खिलाड़ी सूर्यवंशी के साथ लगभग हाथापाई की नौबत आ गई थी।
- सूर्यवंशी को हलाम्बागे को धक्का देना पड़ा जो तीखी बहस के दौरान उनके बहुत करीब आ गए थे।
- इसके बावजूद वैभव का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वह पीछे हटते हुए भी विरोधी खिलाड़ी को लगातार खरी-खोटी सुनाते नजर आए।
वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ियों की लड़ाई
- फोटो : Screegrab X
श्रीलंका के खिलाड़ियों पर हुई कार्रवाई
हलाम्बागे और डिकवेला पर श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) द्वारा नियुक्त मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की थी। सजा क्या मिली थी, इसका पता नहीं चला था। इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी कि सूर्यवंशी और कप्तान तिलक वर्मा समेत अन्य भारतीय खिलाड़ियों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया या उन पर आधिकारिक कार्रवाई की गई थी। तिलक समेत भारतीय खिलाड़ियों की अंपायरों के साथ लंबी बहस हुई थी और वे कम रोशनी में सुपर ओवर कराने पर जोर दे रहे थे।
हलाम्बागे और डिकवेला पर श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) द्वारा नियुक्त मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की थी। सजा क्या मिली थी, इसका पता नहीं चला था। इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी कि सूर्यवंशी और कप्तान तिलक वर्मा समेत अन्य भारतीय खिलाड़ियों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया या उन पर आधिकारिक कार्रवाई की गई थी। तिलक समेत भारतीय खिलाड़ियों की अंपायरों के साथ लंबी बहस हुई थी और वे कम रोशनी में सुपर ओवर कराने पर जोर दे रहे थे।