क्रिकेट में अकसर कहा जाता है कि खिलाड़ी के कोच या पिता निश्चित करते हैं कि उनकी बेटा/बेटी बल्लेबाज बनेगा या गेंदबाज। भारतीय क्रिकेट टीम में भी ऐसा कई उदाहरण हैं जिनमें पिता अपने बेटे को सही दिशा बताकर सफलता की ओर लेकर गए।
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कप्तान विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली, चेतेश्वर पुजारा के पिता अरविंद पुजारा जैसे तमाम उदाहरण हैं, जो अपने बेटे की सफलता में पर्द के पीछे के हीरो रहे हैं। पुजारा के पिता के बारे में कहा जाता है कि वो उन्हें बड़े मैचों में ध्यान लगाने लेकर पारी की शुरुआत की सीख देते हैं।
मगर टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन इस मामले में थोड़े अलग हैं। अश्विन बताते हैं कि उनकी मां ने उनके लिए एक बड़े कोच की भूमिका अदा की। उनकी मां के पास उनके हर मैच में प्रदर्शन की रिपोर्ट होती थी। यहां तक नेट्स वो गेंद और बल्ले के साथ उनके प्रदर्शन को लिखती थीं।
उनकी मां उन्हें सलाह भी दिया करतीं थी। अश्विन ने एक दुबले-पतले गेंदबाज के रूप में करियर की शुरुआत की मगर उनकी मां चित्रा ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी पर ध्यान देने के लिए कहा। अपनी मां की बात माकर अश्विन आज उस मुकाम पर हैं, जहां भारत का कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं पहुंच पाया।
अश्विन ने 42 टेस्ट मैचों में 24.75 की औसत से 235 विकेट लिए हैं। 140 रन देकर 13 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वही बल्ले से अश्विन ने 35 की औसत ते 1749 रन बनाए हैं। वनडे में भी अश्विन ने 102 मैचों में 31.73 की औसत से 142 विकेट लिए हैं।