बिल्डिंग गिरते हुए जोरदार धमाके की आवाज हुई। मेरे घर में रखा सामान भी हिल गया मुझे ओर मेरी बहू को लगा कि भूकंप आ गया है। हम बाहर निकलीं तो खौफनाक मंजर था। अंधेरा और धूल का गुबार दिखा। कुछ महिला व लोग भागते हुए चिल्ला रहे थे कि बिल्डिंग गिर गई है। ये शब्द शाहबेरी गांव स्थित हादसा ग्रस्त इमारत के सबसे करीब स्थित भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली मूलरूप से गया बिहार निवासी महिला शोभा सिंह के हैं।
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building collapse shaberi
- फोटो : अमर उजाला
शोभा ने बताया कि उसका बेटा सोनल प्रकाश राजपूत फरीदाबाद में एक कंपनी में नौकरी करता है। मंगलवार रात भी वह फरीदाबाद में था और उसकी नाइट ड्यूटी थी। घर में केवल वह और उसकी बहू सोनी मौजूद थी। जब हादसा हुआ हुआ तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया।
घर में रखे सामान तेज धमक के कारण हिले तो उन्हें भूकंप आने का एहसास हुआ और वह घर से बाहर निकल आईं। इसके बाद वह रात भर जागते रहे और अधिकांश समय घर के बाहर ही राहत बचाव कार्य को देखते रहे। हादसे की खबर सुनकर उनका बेटा भी फरीदाबाद से लौट आया। उन्होंने बताया कि हादसा ग्रस्त भवन में कुछ परिवार रहने लगे थे।
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बिल्डिंग गिरी
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दूसरी बिल्डिंग का काम निपटाकर शाम आता था ठेकेदार रंजीत
सबमर्सिबल लगाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि रंजीत प्लास्टर ठेकेदार था। उसकी लेबर निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम कर रही थी। उसके अंडर में कई मजदूर काम करते हैं। वह दिन में दूसरी निर्माणाधीन बिल्डिंग पर काम देखता है। शाम को हादसा ग्रस्त हुई निर्माणाधीन बिल्डिंग पर काम देखने आता है और अपने मजदूरों को रुपया आदि देता है। उसका भी मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। रंजीत के परिजन भी मौके पर पहुंचकर उसे तलाश रहे थे। मलबे से निकाले गए शवों में से एक रंजीत भीमाली निवासी पश्चिम बंगाल का भी था। इससे अन्य मजदूरों के भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
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गृह प्रवेश कर कन्याओं को दिए थे 11-11 रुपये
सबमर्सिबल लगाने वाले युवक ने ही बताया कि मंगलवार को ही एक परिवार ने तैयार हो चुकी बिल्डिंग में शिफ्ट कर पूजा आदि की थी। उसने बताया कि पूजा के बाद उन्होंने कन्याओं को प्रसाद व 11-11 रुपये भी दिए थे। उसकी बेटी को भी उन्होंने रुपये दिए थे। उसने दावा किया कि तैयार हो चुकी बिल्डिंग में कम से कम छह परिवार रह रहे थे।