इस शख्स के संघर्ष की कहानी पढ़कर आप सेल्यूट करेंगे। दायां हाथ कट गया और 10वीं में पढ़ाई छूट गई, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी। देखिए तस्वीरें।
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चंडीगढ़ के जगदीश सिंह की संघर्ष भरी कहानी
- फोटो : अमर उजाला
ये शख्स हैं, चंडीगढ़ निवासी जगदीश सिंह। 16 साल के थे, जब दायां हाथ बिजली की मोटर में आ गया और उसे काटना पड़ा। उस समय ऐसा लगा मानो जिंदगी खत्म हो गई। लिख न पाने के कारण 10वीं में फेल हो गए और फूट-फूट कर रोए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ठान लिया कि अपने इस नसीब को बदल कर रहेंगे। बाएं हाथ से लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी। लगन इतनी थी कि जल्दी ही बाएं हाथ से लिखने लगे।
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चंडीगढ़ के जगदीश सिंह की संघर्ष भरी कहानी
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जगदीश बताते हैं कि उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अगले ही साल 10वीं की परीक्षा बाएं हाथ से लिखकर दिए। नतीजा देखकर उन्हें यकीं ही नहीं हुआ। मां-बाप भी हैरान रह गए। उसके बाद केस बांधने में भी दिक्कत हुई। मन हुआ कि केस कटवा लूं, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत नहीं हुई।
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चंडीगढ़ के जगदीश सिंह की संघर्ष भरी कहानी
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जगदीश ने बताया कि ये सोचकर कि लोगों को क्या जवाब दूंगा, मैंने अपने केस नहीं कटवाए और एक हाथ से केस और पगड़ी बांधनी शुरू की। अब तो 5-10 मिनट में ही एक हाथ से पगड़ी बांध लेता हूं। एक हाथ से बाइक और कार भी चला लेता हूं। अब मुझे अपने बेटे पर गुस्सा आता है, क्योंकि वह दोनों हाथों से पगड़ी बांधने में एक घंटा लगा देता है।
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चंडीगढ़ के जगदीश सिंह की संघर्ष भरी कहानी
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जगदीश बताते हैं कि 1991 में उन्हें चंडीगढ़ के खेल विभाग में नौकरी मिल गई। एक बार ड्यूटी सेक्टर-23 के स्विमिंग पूल में लग गई। वहां स्विमिंग कोच से बात की और उन्होंने मुझे स्विमिंग सिखाई। फिर मैंने स्केटिंग सीखी, एथलेटिक्स में भी हाथ आजमाया। गाजियाबाद में 15वीं सीनियर पैरा नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रांच मेडल भी जीता। फिजिकल हैंडीकैप्ड भांगड़ा ग्रुप भी बनाया और न्यूयॉर्क तक भांगड़ा परफॉर्मेंस भी दी।