फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जज्बाः दूसरों के बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ी अपने बच्चों की ममता

Sun, 14 Aug 2016 09:24 AM IST
निशांत खनी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
निशांत खनी/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 14 Aug 2016 09:24 AM IST
विज्ञापन
teacher left her kids for literate others kid
teacher left her kids for literate others kid

हल्‍द्वानी के दुर्गम क्षेत्र बाना प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका रितु वर्मा सरकारी स्कूलों के टीचरों के लिए आइना हैं। रितु ने बाना स्कूल में एक बच्चे को पढ़ाने के लिए अपने दो बच्चों की ममता छोड़ दी। रितु की जीवटता से स्कूल में अब बच्चों की संख्या बढ़कर छह पहुंच गई। रितु बाना गांव की बेटी बन चुकी है। छह बच्चों को पढ़ाने के साथ खुद ही स्कूल का रंग रोगन करती हैं।

teacher left her kids for literate others kid
teacher left her kids for literate others kid
भीमताल बीआरसी का बाना अंतिम छोर के प्राइमरी स्कूलों में शामिल है। शिक्षा के विभाग के कागजों में स्कूल मौना में दर्ज है। मौना से बाना डेढ़ किमी दुर्गम इलाके में है। स्कूल दशकों पुराना है। 2013 में स्कूल का अपना भवन बना है। इससे पहले स्कूल बाना चर्च परिसर में चलता आया है। बाना ईसाई समुदाय का गांव है।
teacher left her kids for literate others kid
teacher left her kids for literate others kid

गांव की मौजूदा जनसंख्या करीब 200 से अधिक है। गांव में दो लोगों को छोड़कर हर कोई पढ़ालिखा है। बावजूद इसके गांव का एकमात्र प्राइमरी स्कूल हमेशा बच्चों से खाली रहा है। इसकी वजह प्राइमरी स्कूल में किसी भी टीचर के नहीं टिकने और गांव के बच्चों का हल्द्वानी और नैनीताल के मिशनरी स्कूलों में दाखिल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
teacher left her kids for literate others kid
teacher left her kids for literate others kid

14 अगस्त 2013 को बाना प्राइमरी स्कूल में भवाली की रितु की तैनाती हुई। रितु की अपनी नौकरी के कार्यकाल की यह दूसरी पोस्टिंग थी। तब स्कूल में मात्र एक छात्र था। रितु के लिए भवाली से हल्द्वानी होकर बाना स्कूल पहुंचना बेहद लंबा और तीन किमी के बीहड़ जंगल का पैदल सफर था।

विज्ञापन
teacher left her kids for literate others kid
teacher left her kids for literate others kid

बरसात के दिनों में कई जगह नाले उफनाने और जंगली जानवरों का खतरा अलग से। शुरुआत में वो अपने पति के साथ स्कूल आने एवं जाने लगी। पति नैनीताल कोर्ट में अधिवक्ता हैं। कुछ वक्त बाद रितु से स्कूल में एक बच्चे को पढ़ाने के लिए अपने दो बच्चों की ममता छोड़ दी। रितु ने गांव में ही रहने के लिए कमरा ले लिया।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed