ट्रेन टिकट को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अगर आप भी रेल में सफर करते हैं, तो यह खबर जरूर पढ़ें और संभल कर रहें।
रेल यात्रा के दौरान टिकट चेक करने की जिम्मेदारी रेलवे की होती है। यदि किसी व्यक्ति का शव रेलवे ट्रैक पर मिले और उसकी मौत रेल हादसे से हो तो ऐसी स्थिति में उसके पास से टिकट न मिलना उसके परिजनों को मुआवजे से वंचित रखने का कारण नहीं हो सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेलवे ट्रिब्यूनल को याची को चार लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट का यह अहम आदेश सुमन शर्मा की याचिका का निपटारा करते हुए आया है। मूल रूप से हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश ) और वर्तमान में चंडीगढ़ निवासी सुमन शर्मा ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उसके पति राजेंद्र शर्मा 1 मई 2008 को अंबाला से कालका ट्रेन से जा रहे थे। इसके बारे में उन्होंने याची को फोन पर सूचित किया था।
अचानक उन्हें पुलिस से सूचना मिली की उनके पति का शव कालका चंडीमंदिर के बीच ट्रैक पर मिला। सुमन ने बताया कि इसके बाद उन्होंने मुआवजे के लिए रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल कर दी। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि टिकट न होने के चलते मृतक को वैध यात्री नहीं माना जा सकता।
इसके बाद सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को गलत मानते हुए कहा कि महज शव के पास टिकट न मिलना मृतक के परिजनों को मुआवजे से वंचित रखने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि रेलवे को यह साबित करना होगा कि यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहा था।