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सरस्वती की धारा फिर अटकी, नहीं हो पाएगी खुदाई, वजह चौंकाने वाली
गुरदीप सिंह सोढी/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
Updated Mon, 08 Aug 2016 09:21 AM IST
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
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सरस्वती नदी को धरा पर लाने को कोशिशों में रोड़ा अटक गया है। अब नदी की खुदाई नहीं हो पाएगी और इसके पीछे की वजह बेहद चौंकाने वाली है। जानिए।
सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
दरअसल, 13 किलोमीटर लंबाई में इसकी खुदाई में रोड़ा अटक गया है। राजस्व रिकॉर्ड में करीब 13 किलोमीटर का एरिया सरस्वती नदी के नाम पर नहीं होने से यह दिक्कत हुई है। सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ने का जो ट्रायल किया है, वह आधी सरस्वती नदी में ही सिमट कर रह गया। अब वालिंटियर्स के माध्यम से जमीन के मालिकों को स्वेच्छा से अपनी जमीन देने के लिए राजी करने का प्रयास होगा।
सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
जिला प्रशासन की ओर से रुलाहेड़ी से लेकर ऊंचा चांदना तक सरस्वती नदी की खुदाई करवाई गई है। इसकी कुल लंबाई करीब 31 किलोमीटर है। राजस्व रिकॅर्ड में करीब 18 किलोमीटर का एरिया सरस्वती के नाम पर दर्ज है। रिकॉर्ड में शेष 13 किलोमीटर में यह निजी मिल्कियत है। इस कारण प्रशासन यहां खुदाई नहीं करवा पाया है। सिंचाई विभाग अब आधी अधूरी खुदी सरस्वती नदी को ही रूप देने में जुटा है।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
इसके लिए बीते दिनों दादूपुर-नलवी नहर का पानी छोड़कर ट्रायल किया गया। ऊंचा चंदना में दादुपुर-नलवी नहर सरस्वती नदी को क्रॉस करती है। इस प्वाइंट पर ही इस नहर का पानी सरस्वती नदी में छोड़ा गया, जो कि मुस्तफाबाद ब्लॉक में खोदी गई सरस्वती नदी में ही आया। मुस्तफाबाद और बिलासपुर के बीच में करीब 13 किलोमीटर तक नदी की खुदाई न हो पाने से सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माने जाने वाले आदिबद्री के नजदीक रुलाहेड़ी से लेकर बिलासपुर खंड की सीमा तक की गई नदी की खुदाई में यह पानी नहीं आ पाया।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड में करीब 13 किलोमीटर का एरिया सरस्वती के नाम पर नहीं है। लेकिन सर्वे आफ इंडिया की टॉपर शीट में सरस्वती नदी इस 13 किलोमीटर के क्षेत्र से ही गुजरती है। इस 13 किलोमीटर क्षेत्र में करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबाई में तो यह नदी के रूप में ही है।