बॉलीवुड गायक लाभ जंजुआ के बारे में 10 चौंकाने वाली बातें
तीसरी मौत कारण तो आजतक स्पष्ट नहीं पाया है, लेकिन इस मौत ने बॉलीवुड से एक हीरा छीन लिया। बीते 22 अक्टूबर 2015 की सुबह उनका शव उनके घर में बिस्तर पर पर पड़ा हुआ मिला। वे मुंबई के गोरेगांव इलाके में रहते थे। क्वीन फिल्म का 'लंदन ठुमकदा', रब्ब ने बना दी जोडी का 'डांस से चांस', पार्टनर का 'सोणी दे नखरे सोणे लगदे', सिंग इज किंग का 'जी करदा' जैसे कई हिट उनके नाम हैं। लाभ जंजुआ ने शुरुआत पंजाबी गानों से की थी और उनके गाने मुंडेआं तो बच के रहीं ने काफी धूम मचाई थी। बाद में उनका बॉलीवुड का रुख किया। वहां भी झंडे गाड़ दिए। लेकिन बीच में साथ छोड़ चले गए।
बॉलीवुड गायक लाभ जंजुआ के बारे में 10 चौंकाने वाली बातें
बेटे का जन्मदिन नहीं मना सके: गायक लाभ जंजुआ की अपनी कोई औलाद नहीं थी। इस कारण उन्होंने एक बच्चा गोद लिया था। 28 अक्तूबर को उनके बेटे का जन्मदिन है। परिजनों के मुताबिक मुंबई जाने से पहले जंजुआ अपने बेटे के जन्मदिन की तैयारियों में जुटे हुए थे। वह 19 अक्तूबर को मुंबई रवाना होते हुए दोस्तों को फोन पर कह गए थे कि 28 अक्तूबर को उनके बेटे की बर्थडे पार्टी के लिए तैयार रहें।
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57 का कनेक्शन: 1957 में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले में पैदा हुए लाभ सिंह जंजुआं ने 57 वर्ष की आयु में मुंबई स्थित अपने फ्लैट पर ही दिल की बीमारी के चलते दम तोड़ा। इनके पिता का नाम सुच्चा सिंह और मां का नाम राओ कौर है। उनको 26 अक्तूबर को घर वापिस आना था और अगले दिन लुधियाना में जागरण में महामाई का गुणगान करना था।
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गुरुद्वारे में कीर्तन से शुरुआत: लाभ सिंह जंजुआं का एक भाई और तीन बहनें हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गांव माजरी मना सिंह से की। बीए फतेहगढ़ साहिब के माता गुजरी कॉलेज से की थी। उन्होंने संगीत की शिक्षा गुरु जसवंत पंवरा से ली। पहले लाभ जंजुआ स्कूलों-कॉलेज के कार्यक्रमों में गीत गाते और साथ ही कीर्तन आदि में पेशकारी देते। वे गुरुद्वारे में भी कीर्तन करते थे।
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पंजाबी गीतों से हुई शुरुआत: लाभ सिंह जंजुआं ने पंजाबी में अपनी कैसेट निकाली जिनसे उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली। उनकी प्रसिद्ध एलबम में रातां तो लंबे खत और बेवफा माशूक के नाम शामिल हैं। इसके बाद 2002 में गीतकार चन्नी खन्ना वाले का लिखा गीत ‘मुंडियां तो बच के रही, नी तू हुणे हुणे हुई मुटियार’ गाने के बाद वह बॉलीवुड में भी छा गए।