टूटे जग, गंदे चम्मच... शताब्दी में आपका स्वागत है!
टूटी केतली, टूटे जग, गंदे चम्मच और सीलन वाले नैपकिन..., शताब्दी में सफर करने वालों का स्वागत कुछ ऐसे होता है। यात्रियों ने बताए सफर के अनुभव।
टूटे जग, गंदे चम्मच... शताब्दी में आपका स्वागत है!
‘अमर उजाला’ टीम ने सोमवार सुबह 7:40 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना हुई नई दिल्ली-कालका शताब्दी एक्सप्रेस में सुविधाओं का जायजा लिया। सफर शुरू होने के साथ ही खाने-पीने का सामान सर्व करना शुरू किया गया। इसी दौरान हाल ऐसा दिखा कि यात्रियों ने आवाज उठानी शुरू कर दी और जवाब यही मिलते रहे- सही करवा देंगे, देखते हैं।
टूटे जग, गंदे चम्मच... शताब्दी में आपका स्वागत है!
यह सब सुनकर एक बार तो यही आभास हुआ, जैसे किसी सरकारी दफ्तर में बैठे हों। खैर...। कैटरिंग इंचार्ज प्रतिभा और एकाउंट ऑफिसर को बुलाकर सारी चीजों से अवगत करवाया गया, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
टूटे जग, गंदे चम्मच... शताब्दी में आपका स्वागत है!
सबसे पहला वाक्या सी-10 कोच में पीएनआर-2845442355 के साथ सीट नंबर-10 पर बैठे प्रेमलाल खन्ना के साथ देखने को मिला। सुबह-सुबह उन्हें एकदम ठंडा पानी सर्व किया गया। चम्मच मंगवाया तो वह भी गंदा निकला। उन्होंने पानी वापस करने को कहा और दूसरा चम्मच मांगा, लेकिन काफी देर तक उन्हें अनसुना कर दिया गया।
टूटे जग, गंदे चम्मच... शताब्दी में आपका स्वागत है!
सी-10 कोच में ही सीट नंबर-51 पर बैठे पीएस राजपूत ने फूड क्वलिटी को काफी खराब बताया और सर्व करने के तरीकेपर भी सवाल उठाए, क्योंकि उन्हें प्लास्टिक की टूटी केतली में गर्म पानी सर्व किया गया था। केतली की बाहरी दशा ही पानी की शुद्धता बयां कर रही थी।