‘हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे।’ कुछ ऐसी ही तर्ज पर नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस का किला धराशायी करने के बाद बुधवार को प्रदेश प्रधान पद से अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गजों का भी मानना है कि सिद्धू की मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पार्टी की हार का मुख्य कारण बनी। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के गठन और सिद्धू को स्थानीय निकाय विभाग का मंत्री बनाए जाने के बाद बीते पांच साल के दौरान पहले तो सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मुहिम चलाई।
पंजाब में कांग्रेस का किला ढहा: सिद्धू पर पार्टी का दांव कहीं उलटा तो नहीं पड़ा, पढ़ें- 'गुरु' ने कब-कब अपनी ही सरकार को घेरा
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जब सिद्धू के प्रभाव में पार्टी हाईकमान ने कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया तो सिद्धू ने चन्नी को भी नकारा सीएम साबित करने की मुहिम छेड़ दी। कैप्टन के साढे़ चार साल के कार्यकाल के दौरान सिद्धू अपनी ही सरकार की बनाई नीतियों की खुलकर आलोचना करने के अलावा कैप्टन को बेअदबी के दोषियों को सजा नहीं दिला पाने और नशा तस्करी पर लगाम नहीं लगा पाने के लिए मुखर रहे। कई बार तो उन्होंने कैप्टन को अयोग्य मुख्यमंत्री तक कहा। हाईकमान ने माहौल सुधारने के लिए हरीश रावत को पंजाब पार्टी मामलों की कमान सौंपी, लेकिन यह फैसला भी उलटा पड़ गया।
कैप्टन से नाराजगी के चलते कैबिनेट से इस्तीफा देकर अज्ञातवास में चल रहे सिद्धू को रावत यह कहते हुए सक्रिय सियासत में ले आए कि सिद्धू पार्टी के लिए महत्वपूर्ण चेहरा हैं। रावत एक तरफ तो सिद्धू को प्रमोट करते रहे, वहीं सिद्धू इस दौरान कैप्टन पर लगातार हमलावर रहे। आखिरकार हाईकमान ने सिद्धू को प्रदेश प्रधान नियुक्त करके विवाद खत्म करने की कोशिश की। कैप्टन के इस्तीफे के बाद सिद्धू ने खुद को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना चाहा लेकिन सुखजिंदर रंधावा जैसे सीनियर नेताओं के भी दावेदार बन जाने के कारण सिद्धू की इच्छा पूरी नहीं हो सकी और उन्हें चरणजीत चन्नी का समर्थन करना पड़ा। हालांकि यह सिलसिला कुछ दिन चला और सिद्धू चन्नी सरकार के कामकाज में खुला हस्तक्षेप करने लगे।
एजी और डीजीपी की चन्नी द्वारा नियुक्ति से वह इतने आहत हुए कि उन्होंने प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया। जैसे-तैसे दोनों अफसरों को हटाकर सिद्धू के मनाया गया लेकिन सिद्धू के तेवरों में कोई अंतर नहीं आया। विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान भी सिद्धू अपना पंजाब मॉडल लाए और पार्टी पर उन्होंने दबाव बनाने की कोशिश की है कि इस मॉडल को ही पार्टी का मेनिफेस्टो घोषित किया जाए। बीते दिनों कांग्रेस वर्किंग कमेटी और हरीश रावत द्वारा हार पर मंथन के लिए बुलाई गई बैठकों में यह बात सामने आई कि सिद्धू की बयानबाजी पार्टी की करारी हार का कारण बनी।
सिद्धू के इन बयानों ने डुबोई लुटिया
- 03 नवंबर, 2021 कैप्टन को बताया दगा हुआ कारतूस
- 11 नवंबर, 2021 पंजाब के खजाने को लेकर दिया बयान
- 19 नवंबर, 2021 पाक के पीएम को बताया बड़ा भाई
- 26 दिसंबर, 2021 थानेदार की पैंट गीली हो जाती है
- 11 जनवरी, 2022 आलाकमान नहीं पंजाब तय करेगा चेहरा
- 07 फरवरी, 2022 चन्नी के मुख्यमंत्री बनाए जाने पर उठाए सवाल
- 12 फरवरी, 2022 पार्टी से अलग निकाला पंजाब मॉडल