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105 डिग्री बुखार, पर हिम्मत नहीं हारा स्वर्ण और रच दिया इतिहास, फिल्मी है चैम्पियन बनने की कहानी

Sat, 25 Aug 2018 03:03 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 25 Aug 2018 03:03 PM IST
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Asian Games 2018 Gold Medal Winner Swarn Singh Success Story
स्वर्ण सिंह
105 डिग्री बुखार से तप रहा था स्वर्ण सिंह, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस होनहार के चैम्पियन बनने की कहानी भी काफी फिल्मी है, पढ़िए।


 
Asian Games 2018 Gold Medal Winner Swarn Singh Success Story
स्वर्ण सिंह
18वें एशियन गेम्स 2018 में शुक्रवार का दिन भारतीय रोवर्स के नाम रहा। इसमें पंजाब के तीन युवाओं ने शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए दो मेडल जीते। इनमें स्वर्ण सिंह और सुखमन ने गोल्ड मेडल जबकि भगवान सिंह ने ब्रांज मेडल जीतकर देश के साथ पंजाब का नाम भी रोशन कर दिया। स्वर्ण सिंह और सुखमन पंजाब के मानसा जिले के रहने वाले हैं, जबकि भगवान सिंह मोगा (पंजाब) के निवासी हैं और फिलहाल रोपड़ में रह रहे हैं।
Asian Games 2018 Gold Medal Winner Swarn Singh Success Story
स्वर्ण सिंह
इन तीनों खिलाड़ियों का चंडीगढ़ से भी अटूट रिश्ता है। मौजूदा समय में तीनों सेना के रोवर्स हैं और पुणे में तैनात हैं। स्वर्ण सिंह सेना में सूबेदार हैं जबकि भगवान सिंह और सुखमन सिपाही की पोस्ट पर हैं। एशियन गेम्स का आयोजन इन दिनों इंडोनेशिया के जकार्ता में किया जा रहा है। रोइंग इवेंट में कई देशों की बेहतरीन टीमें शिरकत कर रही हैं। अमर उजाला ने मेडल जीतने वाले तीनों खिलाड़ियों से खास बातचीत की।
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Asian Games 2018 Gold Medal Winner Swarn Singh Success Story
स्वर्ण सिंह
स्वर्ण सिंह ने बताया कि एशियन गेम्स शुरू होने से पहले मुझे टाइफाइड हो गया था। उस समय मैंने रोइंग को अलविदा कहने का मन बना लिया था, लेकिन रोइंग एसोसिएशन के अधिकारियों ने मुझे समझाया कि ऐसा मत करो, तुम पर हमें भरोसा है। बस अभ्यास करते रहो। अधिकारियों की इसी बात ने मेरे हौसले को और बढ़ा दिया। बीमार होने के बावजूद एशियन गेम्स से दो महीने पहले मैंने अभ्यास शुरू कर दिया और इसका नतीजा सबके सामने है।
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Asian Games 2018 Gold Medal Winner Swarn Singh Success Story
स्वर्ण सिंह
स्वर्ण सिंह ने बताया कि भगवान ने मेरा साथ दिया। मेरी मेहनत रंग लाई और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया। जकार्ता से स्वर्ण सिंह ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि परिवार वाले और दोस्त हमेशा यही कहा करते थे कि स्वर्ण सिंह तेरा नाम है। ऐसे में तुमको इस बार स्वर्ण पदक ही जीतकर लौटना है। इस बार मैंने अपना वादा पूरा किया और देश के लिए स्वर्ण जीत लिया।
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