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एक मेजर, खून से लथपथ थे फिर भी ढेर किए पाकिस्तानी जवान, मिला परमवीर चक्र, 5 अनकही बातें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Fri, 07 Dec 2018 09:00 AM IST
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परमवीर होशियार सिंह
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खुद को गोलियां लगी थीं, खून से लथपथ थे, फिर भी हिम्मत नहीं हारे और कई पाकिस्तानी जवान ढेर कर दिए। इन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जानिए उस वीर बहादुर जवान मेजर होशियार सिंह के बारे में अनकही बातें।
भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध विशेष
हम बात कर रहे हैं, मेजर होशियार सिंह की। इनका नाम उन वीर सैनिकों में शामिल था, जिन्होंने 1971 में हुए भारत-पकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए जीत हासिल की थी। इनकी शूरवीरता के लिए इन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया था। उन्हें जीते जी वीरता के सबसे बड़े पदक परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आगे चलकर वह ब्रिगेडियर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
1971 का भारत पाक युद्ध
होशियार सिंह के बारे में कहा जाता है कि युद्ध में उन्हें कई गोलियां लगी। खुद खून से लथपथ थे, पर हिम्मत नहीं हारे। युद्ध खत्म होने के दो घंटे पहले तक घायल होते हुए भी बहादुरी से दुश्मन के सामने डटे रहे। अपने सैनिकों का हौंसला बढ़ाते रहे, उन्हें बहादुरी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। दुश्मन के साथ युद्ध में डटकर मुकाबला किया और एक के बाद एक दुश्मन देश के सैनिकों को रास्ते से हटाते गए।
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1971 का भारत पाक युद्ध
हरियाणा के सोनीपत जिले के सिसाना गांव में 5 मई 1936 को होशियार सिंह का जन्म हुआ था। होशियार सिंह के पिता हीरा सिंह किसान थे। होशियार सिंह की प्रारंभिक शिक्षा सोनीपत के स्थानीय स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए जाट हायर सेकेंडरी स्कूल और जाट कॉलेज में दाखिला लिया। वे पढ़ने में होशियार थे। वे वालीबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी थे। वे पंजाब टीम के कप्तान बने और फिर नेशनल टीम का हिस्सा बन गए।
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1971 war
1957 में 2, जाट रेजीमेंट में सिपाही के तौर पर उनकी भर्ती हुई। 6 साल बाद परीक्षा पास करने के बाद वो सेना में अधिकारी बनने में कामयाब हुए। 30 जून 1963 को ग्रेनिडियर रेजीमेंट में उन्हें कमीशन मिला। नेफा यानि नॉर्थ इस्ट फ्रंटियर एजेंसी में तैनाती हुई। 1965 में भारत-पाकिस्तान लड़ाई में उन्होंने बीकानेर सेक्टर में अहम भूमिका अदा की। उन्हें असाधारण सेवा के लिए मेंशन इन डिस्पैच हासिल किया, लेकिन 6 साल बाद देश और दुनिया उनकी शूरवीरता की साक्षी बनी।