Last 7 Minutes Before Death: हर इंसान में मन में मृत्यु को लेकर कई तरह के सवाल आते हैं। कई बार आपके मन में भी ये सवाल आया होगा की मृत्यु के बाद या उससे ठीक पहले क्या होता है? और इस दौरान मनुष्य कैसा महसूस करता है? आज हम आपको इसी से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपको शायद ही जानकारी होगी। दरअसल, मृत्यु से पहले के अंतिम 7 मिनटों में हमारा मस्तिष्क अचानक बहुत अधिक सक्रिय हो जाता है। इस अजीब गतिविधियों पर साइंस ने पर्याप्त शोध किया, जिसके जरिए मरने वाले मस्तिष्क की इलेक्ट्रो केमिस्ट्री के बारे में पता किया गया है। शोध में पता चला कि मृत्यु से पहले के क्षणों में मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में उच्च गामा आवृत्तियां बढ़ने लगती हैं, जो खासतौर पर मृत्यु से पहले ही देखी गई है। यह गतिविधी मृत्यु के निकट मस्तिष्क के एक अनोखे व्यवहार का संकेत है।
Death Facts: मृत्यु से ठीक पहले मस्तिष्क अधिक सक्रिय क्यों हो जाता है? जानिए इस दौरान क्या होता है
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मृत्यु से पहले तंत्रिका गतिविधि के 7 मिनट
मृत्यु से ठीक पहले यानी अंतिम क्षणों में हमारा मस्तिष्क गतिविधि की तीव्र अवस्था में पहुंच जाता है। कुछ अध्ययनों में मस्तिष्क गतिविधि के पैटर्न को देखते हुए, अंतिम क्षणों में सपने और स्मृतियों के स्मरण करने का अनुमान लगाया गया है। इस रहस्यमय अनुभव को “मृत्यु से पहले तंत्रिका गतिविधि के 7 मिनट” (7 minutes of neural activity before death) कहा जाता है। माना जाता है कि इन सात मिनटों में व्यक्ति अपने जीवन के क्षणों को किसी फिल्म की रील की तरह याद करता है।
मृत्यु के बाद भी 7 मिनट तक काम करता है दिमाग
कई स्रोत कहते हैं कि मृत घोषित होने के बाद भी इंसान का दिमाग 7 मिनट तक काम करता है। शोधकर्ताओं ने मृत्यु के दौरान 7 मिनट तक मस्तिष्क की गतिविधियों पर शोध किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्रेन का कॉर्टेक्स ऑनलाइन लौटता है, तो वहां कितना ऑक्सीजन उसमे पहुंचता है। साथ ही देखा गया कि सेरेब्रल कॉर्टेक्स से लेकर मनुष्य के शरीर के अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधि बढ़ जाती है।
आखिरी 7 मिनट में क्या होता है?
- शोध के अनुसार, कथित तौर पर पहला मिनट एक गर्मजोशी चरण होता है, इस दौरान मनुष्य को जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बातें याद आती है। माना जाता है कि महिलाएं आमतौर पर इस समय अपने प्रसव को याद करती हैं और अपने माता-पिता का चेहरा देखती हैं।
- दूसरा मिनट व्यक्ति के बचपन के दोस्तों और उनके पहले खेल के समय को याद दिलाता है। साथ ही इस दौरान लोग अपने भाई-बहनों के साथ गुजारे हुए पलों को याद करते हैं।
- तीसरा मिनट में इंसान अपने सबसे करीबी और प्रेम अनुभवों को याद करता है।
- कथित तौर पर चौथा मिनट उन अकेले पलों का स्मरण होता है जो पहले तीन मिनट में नहीं थे।
- पांचवें मिनट में व्यक्ति अपने जीवन के चमत्कारी क्षणों को देखता है।
- छठे मिनट में व्यक्ति अपने चरित्र का मूल्यांकन करता है और अपने जीवन में मौजूद लोगों के साथ किए गए व्यवहार को याद करता है।
- अंतिम क्षण कथित तौर पर रहस्यमय बना हुआ है। इस आखिरी मिनट के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।