Super El Nino: दुनियाभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण लोगों को भयानक गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। भारत के कई इलाकों में इस बार अप्रैल में ही तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। हालांकि, मई महीने की शुरुआत से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी और बारिश से लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है। लेकिन 9 मई के बाद मौसम में बदलाव होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की हालिया रिपोर्ट्स ने एक बड़ी चेतावनी दी है।
El Nino: 9 मई के बाद बदलेगा मौसम, सुपर अल-नीनो को लेकर जारी हुआ अलर्ट, पड़ेगी भीषण गर्मी और आएगी आंधी-बारिश
Super El Nino: वैज्ञानिकों ने अल नीनो को लेकर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि 9 मई के बाद पूरी दुनिया के मौसम में बदलाव होगा। उनका कहना है कि लोगों को गर्मी, तूफान और बेमौसम बारिश के लिए तैयार रहना होगा।
क्यों खतरनाक है अल नीनो?
इस प्राकृतिक घटना से वायुमंडल में भारी गर्मी पैदा होती है। इससे बारिश का पैटर्न बदलता है। विशेषज्ञों ने कहा कि अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में मानसून के कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 9 मई के बाद सूरज की गर्मी के बढ़ने के साथ अल-नीनो की सक्रियता से अचानक तापमान बढ़ सकता है।
भारतीय मौसम विभाग और विशेषज्ञों की क्या है चेतावनी?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मई 2026 के पूर्वानुमान में जानकारी दी है कि देश के कई इलाकों में बारिश के कारण तापमान सामान्य से कम रहता सकता है, लेकिन देश के कई राज्यों में भीषण हीटवेव का भी खतरा है। गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में रात का तापमान बढ़ेगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल-नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की 61 फीसदी संभावना है। विशेषज्ञों ने कहा कि इतना तेजी से बदलाव होगा कि इंसान को संभलने का मौका नहीं मिलेगा।
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कैसा रहेगा मानसून?
अल-नीनो की वजह से भारत के मानसून पर असर पड़ सकता है, जो चिंताजनक है। डाउन टू अर्थ की हाल ही में हुए अध्ययन में बताया गया है कि अल-नीनो की वजह से साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहता सकता है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने से भारतीय मानसून की हवाएं कमजोर हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को जल संरक्षण की अभी से तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि मानसून के अंत तक अल नीनो का प्रभाव रह सकता है।
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ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ा खतरा
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पहले से ही गर्म है, जिसके कारण सुपर अल-नीनो का खतरा बढ़ गया है। NOAA और नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरी दुनिया का तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है और अल-नीनो से 0.2 की और वृद्धि हो सकती है। इससे साफ है कि 2026 इतिहास का सबसे गर्म वर्ष बो सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 9 मई के बाद दुनियाभर के मौसम में बदलाव होगा। उनका कहना है कि आने वाले दिनों गर्मी के साथ ही अप्रत्याशित तूफान और बेमौसम बारिश बढ़ेगी।