उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने के वजह से आई बाढ़ के बाद एक बार फिर से ग्लेशियर चर्चा का विषय बन गया है। अगर ग्लेशियर का एक छोटा सा टुकड़ा गिरने से जब इतनी बड़ी आपदा आ गई, तो ये जानना बेहद जरूरी है कि सबसे बड़े ग्लेशियर के पिघलने से क्या हाल होगा? अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर दुनिया का सबसे बड़ा और खतरनाक ग्लेशियर माना जा रहा है। इसपर दुनियाभर के विशेषज्ञों की निगाहें हैं।
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ग्लेशियर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : istock
अंटार्कटिका के पश्चिमी इलाके में स्थित ये ग्लेशियर समुद्र के भीतर कई किलोमीटरों की गहराई में डूबा हुआ है। इस ग्लेशियर की अंदरुनी चौड़ाई लगभग 468 किलोमीटर है। बता दें कि समुद्र के भीतर ये ग्लेशियर एक विशालकाय दैत्य की तरह फैला हुआ है। अगर इस ग्लेशियर से मजबूत से मजबूत जहाज भी टकरा जाए, तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है।
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ग्लेशियर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : istock
थ्वाइट्स ग्लेशियर का क्षेत्रफल 1,92,000 वर्ग किलोमीटर है। अगर इतना विशाल ग्लेशियर जब पिघलेगा तो सारी दुनिया में तबाही मच जाएगी। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि इस ग्लेशियर के पिघलने की शुरुआत हो भी चुकी है। नासा के वैज्ञानिकों की मानें, तो इस ग्लेशियर के भीतर छेद हो रहे हैं। इस ग्लेशियर में एक इतना बड़ा छेद हो चुका है, जो अमेरिका के मैनहट्टन शहर का दो-तिहाई है।
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ग्लेशियर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, वैज्ञानिकों को बस इतनी सी जानकारी हासिल करने के लिए खून-पसीना एक करना पड़ा। क्योंकि इस ग्लेशियर के आसपास का मौसम इतना तूफानी होता है कि इसकी सैटलाइट इमेज भी साफ नहीं आ पाती है। मेरिका और ब्रिटेन ने केवल इस ग्लेशियर की तस्वीर निकालने के लिए एक बड़ा करार किया, जिसे इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर कोलेबरेशन कहते हैं।
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ग्लेशियर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि अगर ये ग्लेशियर पिघल जाएगा, तो दुनियाभर के समुद्रों का स्तर 2 से 5 फीट तक बढ़ जाएगा, जिसके वजह से तटीय इलाके पानी से डूब जाएंगे। ऐसे में अलग-अलग देशों की करोड़ों की आबादी या तो मारी जाएगी या फिर विस्थापन का शिकार हो जाएगी। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि इस ग्लेशियर के पिघलने का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और महामंदी आ जाएगी।