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कैसे 4000 किमी दूर ओडिशा पहुंचे ओरंगुटान? वन विभाग के अधिकारी भी हैरान, 25 लाख होती है एक जानवर की कीमत
Wed, 09 Sep 2026 05:11 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Wed, 09 Sep 2026 05:11 PM IST
सार
ओडिशा के बालासोर जिले के बिचित्रपुर वन क्षेत्र में पांच ओरंगुटान मिले हैं। इसके बाद स्थानीय लोग और वन अधिकारी भी हैरान हैं। यह जानवर भारत में नहीं मिलते हैं।
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कैसे 4000 किमी दूर ओडिशा पहुंचे ओरंगुटान? वन विभाग के अधिकारी भी हैरान
- फोटो : ANI
विस्तार
ओडिशा के बालासोर जिले के एक जंगल में पांच ओरंगुटान मिले हैं, जिन्हें स्थानीय लोग और वन अधिकारी हैरान हैं। यह जानवर इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ इलाकों में पाए हैं। भारत के जंगलों में नहीं मिलते हैं। ओरंगुटान को बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक के बडापाही गांव के पास बिचित्रपुर वन क्षेत्र में देखा गया। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि आखिर ओरंगुटान भारत कैसे पहुंचे।
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निगरानी में रखे गए ओरंगुटान
बिचित्रपुर जंगल में पांच छोटे ओरंगुटान मिलने के बाद वन विभाग हैरान है। जंगल में उन्हें देखने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने सभी पांचों ओरंगुटान को पकड़कर जांच की। इस समय उन्हें निगरानी में रखा गया है। इन सभी को बदापई गांव के पास जंगल में पाया गया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे पांचों ओरंगुटान भारत में बालासोर पहुंचे?
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इनका घर बालासोर से लगभग 4000 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के जंगल हैं। माना जा रहा है कि यह खुद चलकर यहां नहीं आए होंगे। अब वन विभाग यह पता कर रहा है कि इन्हें कहीं बाहर से लाकर जंगल में तो नहीं छोड़ा गया।अवैध तरीके से जानवरों की तस्करी का शक भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
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Orangutans Found in Odisha: 4000 किमी दूर ओरंगुटान कैसे आए?#amarujalanews #hindinews pic.twitter.com/20vTeQqBny
— Amar Ujala (@AmarUjalaNews) September 9, 2026
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कहां पाए जाते हैं ओरंगुटान?अभी ओरंगुटान सिर्फ बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों पर जंगलों में पाए जाते हैं, जिनकी तीन किस्में हैं, बोर्नियन, सुमात्रन और तपानुली ओरंगुटान। आंकड़ों के अनुसार जंगल में लगभग 1.19 लाख ओरंगुटान बचे हैं,जिनमें करीब 1,04,700 बोर्नियन, 13,846 सुमात्रन और 800 से भी कम तपानुली ओरंगुटान हैं। तपानुली ओरंगुटान की संख्या सबसे कम है।
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लाखों में है इनकी कीमत
वन अधिकारियों का कहना है कि बंदर की यह प्रजाति ओडिशा में नहीं मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि राज्य में इस तरह की अनोखी वन्यजीव प्रजातियां मिली हैं। अधिकारियों ने बताया कि हो सकता है कि वो भोजन की तलाश में यहां पहुंच गए हो या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत 20 लाख से 25 लाख रुपए होती है।