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अजब-गजब: कहानी दुनिया के सबसे मजबूत जीव की, जो खौलते हुए पानी में भी रह सकता है जिंदा

Fri, 30 Jul 2021 07:02 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Fri, 30 Jul 2021 07:02 PM IST
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tardigrades most toughest creature on the earth which can survive in any types situation
टार्डिग्रेड्स - फोटो : सोशल मीडिया

धरती के सबसे कठोर जीव कहे जाने वाले 'वॉटर बीयर' यानी टार्डिग्रेड्स को आप खौलते पानी में डाल दीजिए, भारी वजन के नीचे कुचल डालिए या फिर अंतरिक्ष में फेंक दीजिए, ये जिंदा रह जाएंगे। इतना ही नहीं साल 2007 में वैज्ञानिकों ने हजारों टार्डिग्रेड्स को सैटेलाइट में डालकर स्पेस में भेज दिया। जब ये स्पेसक्राफ्ट धरती पर लौटा, तो देखा गया कि टार्डिग्रेड्स जीवित थे। यहां तक कि मादा टार्डिग्रेड ने अंडे भी दे रखे थे।




 

आमतौर पर इंसान 35 से 40 डिग्री के तापमान में ही परेशान हो जाता है, वहीं ये जीव 300 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान को सहन कर सकता है। इतना ही नहीं ये जीव अंतरिक्ष के ठंड और मरियाना ट्रेच जैसे भारी दबाव वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है। माना जा रहा है कि टार्डिग्रेड धरती के सबसे मजबूत जीव हैं, जो ज्वालामुखी से लेकर बर्फ में भी जीवित रह जाते हैं। टार्डिग्रेड्स आम तौर पर उन जगहों पर पाए जाते हैं, जो पानी की मौजूदगी के बाद सूख चुकी होती हैं। समय के साथ इस जीव ने शुष्क माहौल में भी अपनी जान बचाए रखने और कई सालों बाद दोबारा पानी पाकर ज़िंदा हो उठने की क्षमता विकसित कर ली है।

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टार्डिग्रेड्स - फोटो : सोशल मीडिया

सूखे की समस्या होने पर टार्डिग्रेड के कुछ ऐसे जीन सक्रिय हो जाते हैं, जो उनकी कोशिकाओं में पानी की जगह ले लेते हैं। फिर वे इसी तरह रहते हैं और कुछ महीनों या सालों बाद, जब दोबारा पानी उपलब्ध होता है, तो अपनी कोशिकाओं को वो दोबारा पानी से भर लेते हैं।

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टार्डिग्रेड्स - फोटो : सोशल मीडिया
रेडिएशन सहने की भी क्षमता

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस जीव के अंदर 'पैरामैक्रोबियोटस' नामक जीन पाया जाता है। पैरामैक्रोबियोटस एक सुरक्षात्मक फ्लोरोसेंट ढाल है, जो अल्ट्रा वॉयलेट रेडिएशन का विरोध करता है। यह जीन हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर उसे हानिरहित नीली रोशनी के रूप में वापस बाहर निकालता है। वहीं सामान्य जीव इन हानिकारक किरणों के बीच महज 15 मिनट तक ही जिंदा रह सकते हैं।

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टार्डिग्रेड्स - फोटो : सोशल मीडिया

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के बायोकेमिस्ट हरिकुमार सुमा ने अपने रिसर्च पेपर में लिखा है कि 'पैरामैक्रोबियोटस' के नमूने यूवी प्रकाश के तहत प्राकृतिक प्रतिदीप्ति प्रदर्शित करते हैं, जो यूवी विकिरण की घातक खुराक के खिलाफ रक्षा करता है।

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टार्डिग्रेड्स - फोटो : सोशल मीडिया

शोधकर्ताओं की माने तो इस जीव के 'पैरामैक्रोबियोटस' को निकालकर अन्य जीवों में भी ट्रांसफर किया जा सकता है। ऐसा करने से अन्य जीव भी खतरनाक हालातों और रेडिएशन के बीच जीवित रह सकते हैं।

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