स्वीडन में पिछले साल नवंबर में उल्कापिंड गिरे थे, वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद बताया है कि इसमें काफी मात्रा में लोहा है। यह उल्कापिंड स्वीडन के उपासला गांव में गिरा था। इस उल्कापिंड पत्थर में काफी मात्रा में लोहा है, इस बात का खुलासा स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री ने किया है। आइए जानते हैं इस अध्ययन में और किन बातों का खुलासा किया गया है।
स्वीडन: 14 किलो के उल्कापिंड में मिली कीमती धातु, अध्ययन में हुआ खुलासा
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स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के मुताबिक इस उल्कापिंड का आकार पाव रोटी के जैसा है। इसका वजन लगभग 14 किलोग्राम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये उल्कापिंड जिस पत्थर से टूटकर गिरा है, उसका वजन 9 टन से अधिक था।
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जहां पर उल्कापिंड गिरा था वहां पर वैज्ञानिकों को उल्कापिंड के छोटे-छोटे टुकड़ें मिले। स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के अनुसार ये टुकड़े 0.1 इंच लंबे थे।
Lumpy, 30-pound meteorite that crashed in Sweden recovered in local village https://t.co/bWmc6qlmcc pic.twitter.com/9UtX1Fx2so
वैज्ञानिकों के अनुसार उल्कापिंड की एक साइड चपटी और दरार से भरी हुई थी और चारों और छोटे से छिद्र थे। इस तरह की आकृति लोहे के उल्कापिंड में बनना काफी सामान्य है। इस तरह के उल्कापिंड के पत्थर स्पेस से आए हुए पत्थर जब वायुमंडल से गुजरते हुए पिघल जाते हैं तब बनते हैं।
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स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री का कहना है कि ये हमारे देश मे गिरे हुए नए उल्कापिंड का पहला उदाहरण है। पत्थर के उल्कापिंड के बाद लोहे के उल्कापिंड, दूसरे सामान्य तरह के पिंड है जो धरती पर गिरते है। ग्रहों और एस्टेरॉयड्स के केंद्र में ये उल्कापिंड पैदा होते हैं।
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