आज से 156 साल पहले 12 जनवरी 1863 को आज के ही दिन समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ था। इस तरह आजादी के बाद भारत में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर हम आपको उनके दिव्य ज्ञान से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं।
विवेकानंद जी ऐसी महान शख्सियत थे कि युवा पीढ़ी हमेशा उनकी जिंदगी से प्रेरित होती रहेगी और उनसे कुछ न कुछ सीखती रहेगी। विवेकानंद का निधन महज 39 साल की उम्र में हो गया था। युवाओं को संबोधित करते हुए उनके कुछ खास संदेश आज भी समसामयिक और उपयोगी हैं। उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने वेद और दर्शन शास्त्र का ज्ञान हासिल कर लिया था।
उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील थे, जबकि मां भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। साल 1884 में पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ गई। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) बड़े अतिथि-सेवी थे, वह खुद भूखे रहकर अतिथियों को खाना खिलाते थे और बाहर ठंड में सो जाते थे। 25 साल की उम्र में अपने गुरु से प्रेरित होकर उन्होंने सांसारिक मोह-माया त्याग दी और संन्यासी बन गए। भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म और दर्शन का पूरी दुनिया में प्रचार-प्रसार करने वाले स्वामी विवेकानंद की ज्ञान की साधना बेहद गहरी रही है। ऐसा माना जाता है कि 1892 में विवेकानन्द कन्याकुमारी आये और समुद्र के बीच एक चट्टान तक तैर कर गये और गहरी ध्यान की मुद्रा में रात बिताई।
इस निर्जन स्थान पर साधना के बाद उन्हें जीवन का लक्ष्य एवं लक्ष्य प्राप्ति हेतु मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ था। आप भी जानिए क्या रहस्य है इस चट्टान का और अब क्या है वहां? दरअसल, हम बात कर रहे हैं कि विवेकानंद रॉक मेमोरियल की। यह तमिलनाडु के कन्याकुमारी में वावाथुरई में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
ऐसा कहा जाता है कि 1893 में विश्व धर्म सभा में शामिल होने से पहले विवेकानंद कन्याकुमारी आए थे। एक दिन वे तैरकर इस विशाल शिला पर पहुंच गए। इस निर्जन स्थान पर साधना के बाद उन्हें जीवन का लक्ष्य एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ था।