चुनाव के इस दौर में सांप्रदायिक सियासत करने वाले मजहब के नाम पर वोट मांग रहे हैं। हिंदू-मुस्लिम को एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़ा कर के वोटों की फसल काटने की कोशिश कर रहे हैं। यूं तो मुसलमान बुतपरस्ती के सख्त खिलाफ हैं। मूर्ति पूजा करने वालों को काफिर कहते हैं। पर, भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां हिंदू-मुसलमान एक ही देवी की पूजा करते हैं। ये जगह हिंदू-मुस्लिम एकता की शानदार मिसाल है। भारत और बांग्लादेश की सीमा पर गंगा के डेल्टा में फैला हुआ इलाका है सुंदरवन। ये दुनिया का सबसे बड़ा दलदली जंगल है। यूनेस्को ने इसे दुनिया के अजूबों में जगह दी है। यहां आने वाले ज्वार-भाटा और दलदली जमीन क़ुदरत के मेल-जोल के संदेश को बखूबी कहते हैं।
सुंदरवन के जंगलों की वो देवी, जिसकी पूजा हिंदी-मुसलमान दोनों करते हैं
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बांग्ला भाषा में सुंदरवन का मतलब होता है ख़ूबसूरत जंगल। करीब 10 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले सुंदरवन में सैकड़ों द्वीप हैं। दलदली इलाके में फैले घने जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते हैं। यहां स्तनधारी जीवों की 50 प्रजातियां मिलती हैं, तो 315 तरह के परिंदे भी आबाद हैं। और सांपों के वंश यानी सरीसृप वर्ग के 315 तरह के जीव यहां रहते हैं। पर, सुंदरवन सबसे ज्यादा मशहूर है रॉयल बंगाल टाइगर के लिए। घने जंगलों में रहने वाला रॉयल बंगाल टाइगर, अब सिर्फ इसी इलाके में पाया जाता है। कई बार वो यहां रहने वालों पर हमला कर के उनकी जान भी ले लेता है। फिर भी, सदियों से इंसान और ये खूंखार जानवर एक साथ सुंदरवन में आबाद हैं।
सुंदरवन इलाके में करीब 45 लाख लोग रहते हैं। इनका मुख्य पेशा मछली मारना और जंगलों से शहद व लकड़ी जुटाना है। जंगल में काम करना मुश्किल भी है और खतरनाक भी। क्योंकि पानी से कब मगरमच्छ, सांप या बाघ हमला कर दे कुछ पता नहीं होता। पर, स्थानीय लोग ये जोख़िम लेने को मजबूर हैं। यहां हर साल करीब 60 लोग रॉयल बंगाल टाइगर के शिकार बनते हैं।
इन तमाम खतरों के ख़िलाफ़ सुंदरवन के ग्रामीणों को एकजुट करती है उनकी आस्था। और ये आस्था है एक देवी के प्रति। इस देवी को भारतीय और बांग्लादेशी, दोनों तरफ के बाशिंदे मानते हैं। इनमें हिंदू भी हैं और मुसलमान भी। अमीर हों या गरीब, सुंदरवन के रहने वाले सभी लोग जंगलों की तरफ कूच करने से पहले इस देवी के सामने सिर नवाते हैं। सुंदरवन के हिंदू-मुसलमानों की इस देवी को वनबीबी के नाम से जाना जाता है। सुंदरवन में तीन प्रमुख नदियां आकर समुद्र में मिलती हैं। इससे पहले इनकी छोटी-छोटी धाराएं दलदली इलाकों से गुजरती हैं। हर तूफान के बाद नदियों के बीच का फर्क मिट जाता है। ठीक इसी तरह सुंदरवन में वनबीबी के आगे हिंदू-मुसलमान का फर्क मिट जाता है। सैकड़ों साल से दोनों समुदायों के लोग एक साथ सुंदरवन में आबाद हैं।
सुंदरवन के रहने वाले शंभूनाथ मिस्त्री कहते हैं कि जानवर जब हमला करते हैं तो वो हिंदू-मुसलमान के बीच फर्क नहीं करते। इसीलिए यहां दोनों समुदायों के लोग वनबीबी की पूजा करते हैं। वनबीबी को सुंदरवन की संरक्षक देवी कहा जाता है। हिंदू-मुसलमान एक साथ उनकी पूजा करते हैं। इलाके में शहद इकट्ठा करने का काम करने वाले हसन मुल्ला कहते हैं कि वनबीबी, सुंदरवन के मुस्लिम समुदाय का अटूट हिस्सा हैं। हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों, पूजा-पाठ में एक-दूसरे को बुलाते हैं।