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वो समुद्री घास, जो भविष्य में खाना और ईंधन दोनों में आ सकती है काम

Mon, 07 Sep 2020 12:13 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Mon, 07 Sep 2020 12:13 PM IST
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seaweed which can come in both food and fuel in future
समुद्री घास - फोटो : Pixabay

फूड इंडस्ट्री और दूसरी मांगों के बढ़ने को देखते हुए ग्रेगसन की फर्म यूरोप और उत्तरी अमरीका में समुद्री शैवालों की कतार के बीचोंबीच है। वो कहते हैं, "आपके पास बायोमास है, जिसका इस्तेमाल खाने और खिलाने के लिए किया जा सकता है। साथ ही यह जीवाश्म आधारित उत्पादों की भी जगह ले सकता है।"



समुद्री शैवाल तेजी से बढ़ने वाली शैवाल है। ये शैवाल सूरज की रोशनी से ऊर्जा लेती है और समुद्री पानी से पौष्टिक तत्व और कार्बन डाईऑक्साइड। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि समुद्री शैवाल जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं और कार्बन उत्सर्जन की भरपाई भी कर सकते हैं। ओशियन रेनफॉरेस्ट को हाल ही में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी से फंड मिला है ताकि वे कैलिफोर्निया में भी ऐसा ही सिस्टम बनाएं। समुद्री शैवाल को निकालने का काम हो तो जल्दी जाता है लेकिन यह काम काफी गंदगीभरा है।

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समुद्री घास - फोटो : Pixabay

लेकिन कंपनी तेजी से बढ़ रही है और इसकी क्षमता को इस साल दोगुना किये जाने की योजना है। हालांकि इससे तुंरत अभी पैसा नहीं बन रहा है लेकिन ऐसी उम्मीद है कि बहुत जल्दी ही इससे पैसा भी मिलने लगेगा। ग्रेगसन कहते हैं, "हम देख सकते हैं कि हम इसे कैसे इसका मशीनीकरण कर सकते हैं और कैसे हम इसे एक बड़े पैमाने की गतिविधि बना सकते हैं।"

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समुद्री घास - फोटो : Pixabay

सौंदर्य प्रासाधन और दवाइयां
समुद्री शैवाल को तुरंत प्रोसेस करने की जरूरत होती है। फारोइस गांव में एक छोटे से प्लांट में, कटाई के बाद लाए गए समुद्री शैवाल को साफ किया जाता है। कुछ को सुखा दिया जाता है और फूड मैन्युफैक्चरर को भेज दिया जाका है। इसके बाद जो बचता है कि उसे फर्मन्टेड (किण्वित) किया जाता है और पशु चारा बनाने वाली कंपनियों को भेज दिया जाता है।

समुद्री शैवाल की खेती का एक बड़ा हिस्सा खाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है लेकिन इसके अर्क का इस्तेमाल कई तरह की चीजों में किया जाता है। चाहे वो टूथपेस्ट हो, कॉस्मेटिक हो, दवाइयां हो या फिर पालतू जानवरों के खाने में। इन सभी में हाइड्रोकोलॉयड्स होता है जोकि समुद्री शैवाल से ही आता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल अब टेक्सटाइल्स और प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर, वॉटर कैप्सूल बनाने में और ड्रिंकिंग स्ट्रॉ के तौर पर भी किया जा रहा है। समुद्री शैवाल का उत्पादन इस समय अपने चरम पर है।

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समुद्री घास - फोटो : Pixabay

साल 2005 से 2015 के बीच इसकी मात्रा दोगुनी हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, सलाना 30 मिलियन टन समुद्री शैवाल का उत्पादन किया जा रहा है। दुनिया भर में इसका व्यापार 6 अरब डॉलर से भी अधिक का है। बावजूद इसके एशिया के बाहर के कुछ ही हिस्सों में इसकी खेती होती है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि यह श्रम प्रधान गतिविधि है।

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समुद्री घास - फोटो : Pixabay

बहुत अधिक श्रम की जरूरत
डेनमार्क में आरहस यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ वैज्ञानिक एनेट ब्रह्न कहती हैं, "यूरोप में मजदूरी काफी महंगी है। इसलिए यह एक बहुत बड़ी वजह है।" इसकी पैदावार को किफायती बनाने की बात पर वो कहती हैं, "इसके लिए पैदावार बढ़ाने की जरूरत है और लागत कम करने की।"

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