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अजब-गजब: कहानी भारत के एक हिंदू राजा की, जो अपने रियासत का पाकिस्तान में करना चाहते थे विलय

Sun, 01 Aug 2021 05:27 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 01 Aug 2021 05:27 PM IST
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rajsthan hindu maharaja hanwant singh who wanted to join jinnah and merge with pakistan
राजा हनवंत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

भारत में अंग्रेजों से आजादी का दिन तय होते ही ये भी तय हो गया था कि भारत और पाकिस्तान के भौगोलिक क्षेत्र में आने वाली रियासतों के राजाओं को इन दोनों देशों में अपने राज्यों का विलय करना होगा। लेकिन ऐसे कई राजा थे, जो इस काम के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। राजा-रजवाड़ों के किस्सों की ही तरह राजस्थान का भारत में विलय भी दिलचस्प कहानी की तरह है। 1947 में जब देश आजाद हुआ था, तो मुगल और अंग्रेजों की शासन पर पकड़ खत्म हो चुकी थी और देशी रियासतों ने फिर से ताकत जुटाना शुरू कर दिया था।


 

मौजूदा राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र के लिहाज से देखें तो आजादी के वक्त राजस्थान में 22 रियासतें थी, जिनमें से केवल अजमेर (मेरवाड़ा) ब्रिटिश शासन के कब्जे में था। बाकी 21 रियासतें स्थानीय शासकों के अधीन थी। ब्रिटिश सरकार से भारत के आजाद होते ही अजमेर रियासत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के करारों के मुताबिक खुद-ब-खुद भारत का हिस्सा बन गई।

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राजस्थान का नक्शा - फोटो : सोशल मीडिया

शेष 21 रिसासतों में से ज्यादातर राजा खुद को स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग कर रहे थे। राजाओं का कहना था कि उन्होंने आजादी के लिए संघर्ष किया है और उन्हें शासन चलाने का अच्छा तजुर्बा भी है। इसलिए उनके राज्यों को स्वतंत्र राज्य के तौर पर भारत में शामिल किया जाए और शासन उनके ही अधीन बना रहने दिया जाए। इनमें से एक जोधपुर रियासत भी थी, जिसके शासक अपने रियासत को पाकिस्तान में विलय करना चाहते थे। कॉलिंस और डोमिनिक लेपियर की किताब फ्रीडम एट मिडनाइट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है।

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मोहम्मद अली जिन्ना - फोटो : Facebook/Ali Moeen Nawazish

मोहम्मद अली जिन्ना भी जोधपुर (मारवाड़) को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे। वहीं जोधपुर के शासक हनवंत सिंह कांग्रेस के विरोध और अपनी सत्ता स्वतंत्र अस्तित्व की महत्वाकांक्षा में पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे। अगस्त 1947 में हनवंत सिंह धौलपुर के महाराजा तथा भोपाल के नवाब की मदद से जिन्ना से मिले। हनवंत सिंह की जिन्ना से बंदरगाह की सुविधा, रेलवे का अधिकार, अनाज तथा शस्रों के आयात आदि के विषय में बातचीत हुई। जिन्ना ने उन्हे हर तरह की शर्तों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

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हनवंत सिंह और उनकी पत्नी - फोटो : सोशल मीडिया

भोपाल के नवाब के प्रभाव में आकर हनवंत सिंह ने उदयपुर के महाराणा से भी पाकिस्तान में सम्मिलित होने का आग्रह किया। लेकिन उदयपुर ने हनवंत सिंह के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि एक हिंदू शासक हिंदू रियासत के साथ मुसलमानों के देश में शामिल नहीं होगा।

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जोधपुर रियासत के राजा हनवंत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

हनवंत सिंह को भी इस बात ने प्रभावित किया और पाकिस्तान में मिलने के सवाल पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया। पाकिस्तान में मिलने के मुद्दे पर जोधपुर का माहौल तनावपूर्ण हो चुका था। जोधपुर के ज्यादातर जागीरदार और जनता पाकिस्तान में शामिल होने के खिलाफ थे। माउंटबेटन ने भी हनवंत सिंह को समझाया कि धर्म के आधार पर बंटे देश में मुस्लिम रियासत न होते हुए भी पाकिस्तान में मिलने के उनके फैसले से सांप्रदायिक भावनाएं भड़क सकती हैं। वहीं सरदार पटेल किसी भी कीमत पर जोधपुर को पाकिस्तान में मिलते हुए नहीं देखना चाहते थे।

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