हाल ही में हुए शोध में इस बात का दावा किया जा रहा है कि समुद्र में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने की वजह से मछलियों की कुछ प्रजातियों में प्रजनन शक्ति भी बढ़ने लगेगी। एडिलेड विश्वविद्यालय के शोध में पाया गया है कि भविष्य में अधिक अम्लीय महासागरों में मछली की कुछ प्रजातियों में बड़े यौन अंगों की वजह से प्रजनन क्षमता अधिक होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस सदी के अंत में जब महासागरों में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगेगी तब मछलियों की कुछ प्रजातियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अब समुद्र में इस वजह से बढ़ेगी मछलियों की संख्या, शोध में किया गया दावा
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मछली की कुछ प्रजातियों में प्रजनन क्षमता अधिक होगी
- ये प्रजातियां बड़े लिंग वाले अंगों को विकसित करने के लिए पानी के नीचे के पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव कर अधिक शुक्राणु और अंडे पैदा करेंगी। जिस वजह से प्रजनन तंत्र में बदलाव होगा और मछलियों की संख्या में वृद्धि होगी।
विश्वविद्यालय के पर्यावरण संस्थान और दक्षिणी समुद्र पारिस्थितिकीय प्रयोगशालाओं के प्रमुख लेखक प्रोफेसर इवान नागलेकरन का कहना है कि वार्मिंग महासागर कार्बन उत्सर्जन से वायुमंडल में जारी होने वाले अतिरिक्त कार्बन डाई ऑक्साइड के एक तिहाई हिस्से को अवशोषित करते हैं, जिससे महासागरों का अम्लीयकरण होता है।
इस प्रजाति की मछलियों में अंडा और शुक्राणु उत्पादन में वृद्धि होती है
- शोधकर्ताओं का कहना है कि कई प्रजातियों पर समुद्री अम्लीकरण का नकारात्मक प्रभाव भी पड़ने लगता है। लेकिन इस शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ मछलियों प्रजातियों जैसे ट्रिपलएफिन पर समुद्र के अम्लीकरण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने की वजह से इस प्रजाति की मछलियों में अंडा और शुक्राणु उत्पादन में वृद्धि होती है।
सह-लेखक प्रोफेसर सीन कॉनेल का कहना है कि, "ट्रिपलफिन और इसी तरह की अन्य प्रजातियों पर समुद्र में अम्लीकरण के बढ़ने पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पडे़गा।" "अध्ययन से ये भी पता चलता है कि कुछ, अधिक प्रभावी, प्रजातियां समुद्र के अम्लीकरण के तहत पारिस्थितिक तंत्र में सकारात्मक परिवर्तन करने में सफल होंगी, जिससे उनकी आबादी बढ़ जाएगी।"