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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन, जिसमें यात्रियों को गर्मी से बचाने के लिए लगाई जाती थीं बर्फ की सिल्लियां

Fri, 04 Sep 2020 05:30 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Fri, 04 Sep 2020 05:30 PM IST
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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन - फोटो : सोशल मीडिया

आज से 92 साल पहले सितंबर के महीने में ही भारत की एसी बोगी वाली ट्रेन दौड़ी थी। यह ट्रेन आज भी सेवा में है और पटरियों पर दौड़ते हुए लोगों को उनके मंजिल तक पहुंचा रही हैं। हालांकि, इस ट्रेन का पुराना नाम भले ही बदल दिया गया है, लेकिन इसकी पुरानी शान आज भी कायम है। 1 सितंबर 1928 को शुरू हुई इस ट्रेन का नाम फ्रंटियर मेल था, जो स्वंतत्रता आंदोलन की गवाह रही है। इस ट्रेन में अनोखी बोगियां इस्तेमाल में लाई जाती थीं।

फ्रंटियर मेल की एसी बोगी

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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन - फोटो : सोशल मीडिया

फ्रंटियर मेल की एसी बोगी सबसे खास थी। इस बोगी में यात्रियों को गर्मी से बचाने के लिए बर्फ की सिल्लियों का प्रयोग किया जाता था। इसके बाद कई स्टेशनों पर पिघले हुए बर्फ का पानी निकालकर नई सिल्लियां लगाई जाती थीं। इस ट्रेन में लगा पंखा कोच के सभी कूपों में ठंडक पहुंचाता था। इस ट्रेन में साल 1934 में एसी लगाए जाने का काम शुरू हुआ और यह भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन बनी।

अंग्रेज अफसरों के अलावा स्वतंत्रता आंदोलन के नेता कर चुके हैं सफर

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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन - फोटो : सोशल मीडिया

स्वतंत्रता आंदोलन की गवाह रही फ्रंटियर मेल मुंबई से अफगान बार्डर पेशावर तक की लंबी दूरी तय करती थी। इस ट्रेन में अंग्रेज अफसरों के अलावा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेता यात्रा करते थे। फ्रंटियर मेल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी यात्राएं की थीं।

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फ्रंटियर मेल की शुरुआत

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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1928 में 1 सितंबर को फ्रंटियर मेल ने अपना सफर मुंबई के बल्लार्ड पियर मोल रेलवे स्टेशन से अफगान बार्डर पेशावर तक शुरू की थी। 1 सितंबर 2020 को इस ट्रेन के 92 साल पूरे हो गए। फ्रंटियर मेल 2335 किलोमीटर लंबी यात्रा को 72 घंटों में पूरा करती थी। इस ट्रेन क एक खासियत ये भी रही कि यह कभी देरी से नहीं चलती थी।

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साल 1996 में बदल गया इस ट्रेन का नाम

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भारत की पहली एसी बोगी वाली ट्रेन - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1996 में फ्रंटियर मेल का नाम बदलकर गोल्डन टेंपल मेल (स्वर्ण मंदिर मेल) कर दिया गया। आजादी से पहले चल रही ये ट्रेन मुंबई, बड़ौदा, मथुरा, दिल्ली, अमृतसर, लाहौर, से होते हुए पेशावर तक का सफर तय करती थी। अंग्रेज अधिकारियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन को समुद्र के किनारे बने बल्लार्ड पियर मोल रेलवे स्टेशन से चलाया जाता था। लंदन से भारत आने वाले अंग्रेज अधिकारियों के जहाज के साथ ही इस ट्रेन का टिकट भी जुड़ा होता था।

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