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जापान का क्रांतिकारी कदम, बना रहा है लकड़ी की सैटेलाइट

Tue, 29 Dec 2020 03:28 PM IST
योगेश जोशी फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश जोशी Updated Tue, 29 Dec 2020 03:28 PM IST
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japan technology and science Japan to build wooden satellites to cut space junk
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

जापान की एक कंपनी और क्योटो विश्वविद्यालय साथ मिलकर दुनिया की पहली लकड़ी की सैटेलाइट बनाने पर काम कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि साल 2023 तक वो इसे बनाने में कामयाब होंगे।सुमितोमो फॉरेस्ट्री कंपनी के मुताबिक उन्होंने इसके लिए पेड़ की ग्रोथ और अंतरिक्ष में लकड़ी की सामग्री के उपयोग पर शोध शुरू कर दिया है। पहले इस मटीरियल का प्रयोग पृथ्वी के अलग-अलग वातावरण में किया जाएगा। उपग्रहों की बढ़ती संख्या के कारण अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता जा रहा है, इसे स्पेस जंक कहते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

लकड़ी के सैटेलाइट पृथ्वी के वातावरण में लौटने पर जल जाएंगें, इनसे किसी तरह के हानिकारक पदार्थ नहीं निकलेंगे और किसी तरह का मलबा भी धरती पर नहीं गिरेगा।

जापान के अंतरिक्ष यात्री और क्योटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ताका दोई के मुताबिक "सभी उपग्रह जो पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करते हैं, वो छोटे एल्यूमिनियम कण बनाते हैं, जो कई वर्षों तक ऊपरी वायुमंडल में तैरते रहते हैं, इस बात से हम चिंतित हैं," "ये पृथ्वी के पर्यावरण को प्रभावित करेंगे।"

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

उन्होनें बताया, “अगले चरण में उपग्रह के इंजीनियरिंग मॉडल का विकास किया जाएगा, फिर हम उड़ने वाले मॉडल बनाएंगे," दोई ने मार्च 2008 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा किया था।

इस मिशन के दौरान, वह अंतरिक्ष में बूमरैंग फेंकने वाले पहले व्यक्ति बन गए। बूमरैंग को विशेष रूप से माइक्रोग्रैविटी में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया था।सुमितोमो फॉरेस्ट्री, सुमितोमो समूह का हिस्सा, जिसे 400 साल से ज्यादा समय पहले स्थापित किया गया था। उन्होंने ने कहा कि वो तापमान परिवर्तन और सूरज की रोशनी का सामना करने वाली प्रतिरोधी लकड़ी की सामग्री को विकसित करने पर काम करेंगे। उन्होंने अभी रिसर्च के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली लकड़ी के बारे जानकारी नहीं दी और कहा वो गोपनीय है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अंतरिक्ष में कचरा

विशेषज्ञों ने पृथ्वी पर गिरने वाले अंतरिक्ष में कचरे के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दी है क्योंकि अंतरिक्ष यान और उपग्रह लॉन्च करने की संख्या लगातार बढ़ रही है। संचार, टेलीविजन, नेविगेशन और मौसम पूर्वानुमान के लिए उपग्रहों का तेजी से उपयोग किया जा रहा है। अंतरिक्ष विशेषज्ञ और शोधकर्ता अंतरिक्ष कबाड़ को हटाने और कम करने के लिए अलग-अलग तरीकों की जांच कर रहे हैं।

वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम के अनुसार, लगभग 6,000 उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगा रहे है। उनमें से लगभग 60 प्रतिशत बेकार (स्पेस जंक) है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Flickr

रिसर्च फर्म यूरोकॉन्सल्ट का अनुमान है कि अलगे एक दशक में हर साल 990 उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे, जिसका मतलब है कि 2028 तक अंतरिक्ष की कक्षा में 15,000 उपग्रह हो सकते हैं। एलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अकेले ही 900 से अधिक स्टारलिंक उपग्रह लॉन्च कर चुकी है। वो हजारों और उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। स्पेस जंक 22,300 मील प्रति घंटे से ज्यादा की गति से घूमते हैं, इसलिए किसी वस्तु के टकराने से काफी नुकसान हो सकता है।

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