करीब दो लाख 70 हजार वर्ग किलोमीटर इस रेतीले और बेहद कम आबादी वाले इलाके में बीते पचास सालों से संघर्ष चल रहा है। अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित वेस्टर्न सहारा कभी स्पेन का उपनिवेश था जिसे 1975 में मोरक्को ने छीन लिया था। साल 1991 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए समझौते से मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच चल रही लड़ाई थम गई थी। पश्चिमी अफ्रीका के संघर्ष को भुलाया जा चुका था लेकिन साल 2020 की दो घटनाओं ने इस पर फिर से रोशनी डाली है। इसी साल मोरक्को ने सीमा पर स्थित एक असैन्य पोस्ट की तरफ कदम बढ़ाए तो फिर से युद्ध जैसे हालात हो गए।
दुनिया की सबसे बड़ी बारूदी सुरंगों वाले इलाके की कहानी
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- बेहद मुश्किल हालात वाला इलाका जिसमें अकूत प्राकृतिक संसाधन हैं...
ये इलाका सहारा रेगिस्तान के पश्चिमी छोर पर है और अटलांटिक महासागर के तट पर एक हजार किलोमीटर तक फैला है। इसके उत्तर में मोरक्को है, पूर्व में अल्जीरिया है जबकि दक्षिण और दक्षिण पूर्व में मॉरिटानिया है।करीब दो लाख सत्तर हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस दुर्गम इलाके में सिर्फ दस लाख के आसपास लोग रहते हैं। यहां फॅास्फेट का बहुत बड़ा भंडार है। मछली पकड़ने के समृद्ध इलाके भी यहां हैं।
- जमीन पर दावे और स्वतंत्रता
मूलरूप से बेर्बेर जनजाति समुदाय का इलाका रहे पश्चिमी सहारा पर 1884 में स्पेन का नियंत्रण हो गया था। 50 साल बाद 1934 में इसे स्पेन के एक प्रांत का दर्जा दे दिया गया था। तब इसे स्पैनिश सहारा कहा गया था।1965 में संयुक्त राष्ट्र ने स्पेन से यहां अपना उपनिवेश समाप्त करने की अपील की थी। मोरक्को की राजशाही ने साल 1959 में स्वतंत्रता हासिल कर ली थी। तब पश्चिमी सहारा पर उसका दावा मजबूत हो रहा था। मोरक्को और मॉरिटानिया सदियों से पश्चिमी सहारा पर अपना-अपना दावा पेश करता रहा था। लेकिन उसी दौरान पश्चिमी सहारा में स्वतंत्रता के लिए भी आंदोलन शुरू हो गया था। 1973 में पोलिसारियो फ्रंट का गठन हुआ।
साल 1974 में स्पेन ने सहारा के लोगों को अधिक स्वतंत्रता देने और अगले साल आजादी को लेकर जनमत संग्रह कराने का एलान कर दिया। लेकिन 1975 में स्पेन बिना जनमत संग्रह कराए इस इलाके को छोड़कर चला गया। उसी दौरान मोरक्को ने इस पर कब्जा कर लिया।
मोरक्को ने अपने देश के लोगों को यहां बसाने पर भी जोर दिया। नवंबर 1975 में मोरक्को से साढ़े तीन लाख से अधिक लोग सीमा पार कर पश्चिमी सहारा में चले आए। तब से ही पोलिसारियो फ्रंट ने मोरक्को के खिलाफ गुर्रिला युद्ध छेड़ दिया जो अगले 16 साल तक चला।फ्रंट ने अल्जीरिया की मदद से सहरावी अरब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (एसएडीआर) घोषित कर दिया। बाद में 1979 में मॉरिटानिया ने पश्चिमी सहारा पर अपना दावा छोड़ दिया।
सालों तक चला संघर्ष
मोरक्को के खिलाफ पोलिसारियो फ्रंट को शुरुआती सालों में कामयाबियां मिली लेकिन बाद में उसे भीतरी इलाकोंं की तरफ भागना पड़ा। 1980 के दशक में मोरक्को ने अपने नियंत्रण वाले इलाकों में रेत और पत्थरों की दीवारें खड़ी करीं ताकि गुर्रिला लड़ाकों को दूर रखा जा सके।
सबसे बाहरी दीवार 2700 किलोमीटर लंबी है जिसके दायरे में पश्चिमी सहारा का 80 फीसदी इलाका आता है जो अब मोरक्को के नियंत्रण में है। इस पर कंटीली तारें लगी हैं और बारूदी सुरंगे बिछी हैं।ये दुनिया के सबसे बड़ी बारूदी सुरंग क्षेत्रों में से एक है। अब एसएडीआर के पास सिर्फ बीस फीसदी इलाका ही है।ये भी रेतीला और खाली रेगिस्तान ही है। साल 1991 में समझौता होने तक लड़ाई चली। समझौते के तहत जनमत संग्रह होना था, जो कभी हो ना सका। बीते साल नवंबर में मोरक्को की सेना एक सीमा चौकी को पार कर गई और फिर से युद्ध जैसे हालात हो गए।