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ज्ञान की बात: वो वैज्ञानिक, जिसने महामारी के खिलाफ पहली बार फेस मास्क को बनाया था हथियार

Tue, 30 Mar 2021 07:05 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 30 Mar 2021 07:05 PM IST
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history and facts of face mask first strategic use against epidemic
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोविड-19 ने साल 2020 में पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया। इस घातक वायरस से बचाव के लिए फेस मास्क लगाना बेहद जरूरी है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि फेस मास्क बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? कोरना के आने से करीब 110 साल पहले एक जानलेवा महामारी पर काबू पाने के लिए एक वैज्ञानिक ने मास्क का ईजाद किया था।

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वू लीन-तेह - फोटो : सोशल मीडिया

बता दें कि 'वू लीन-तेह' नामक वैज्ञानिक ने महामारी पर काबू पाने के लिए सबसे पहले मास्क का ईजाद किया था। मलेशिया के पेनांग में 10 मार्च 1879 को जन्में वू लीन-तेह की शिक्षा यूनाइटेड किंगडम में पूरी हुई थी। लेकिन उनकी सबसे यादगार कर्मभूमी चीन बना, जहां उन्होंने महामारी विशेषज्ञ के तौर पर काम किया। साल 1910 के दिसंबर महीने में उत्तर पूर्व चीन में एक घातक महामारी फैली थी। इस महामारी से पहाड़ी चूहों के शिकारियों और व्यापारियों को सबसे पहले संक्रमित पाया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

महामारी फैलने के दौरान वू लीन-तेह ने महामारी फैलाने वाले बैक्टीरिया के बारे में जानने के लिए सबसे पहला पोस्टमार्टम किया था। इस महामारी को ब्यूबोनिक प्लेग के नाम से जाना जाता रहा। अब बारी थी इस महामारी से लड़ने की।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वू लीन-तेह ने अध्ययन में पाया कि ये महामारी सांस के ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैल सकती है। ऐेस में उन्होंने खुद कॉटन और कपड़े की कई लेयरों को जोड़कर फेस मास्क डिजाइन किया और मेडिकल स्टाफ सहित बाकियों को भी मास्क पहनने के लिए प्रेरित किया, ताकि महामारी को फैलने से रोकने में मदद मिले।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दुनिया के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी महामारी को फैलने से रोकने के लिए फेस मास्क पहनने की रणनीति अपनाई गई हो। हालांकि, उस समय फेस मास्क जैसी चीज पर लोगों का विश्वास हासिल करना आसान नहीं था। ऐसे में वू लीन-तेह की बात मानने से कई लोगों ने इनकार कर दिया। मास्क पहनने से मना करने वाले एक फ्रेंच साथी स्टाफ की मौत प्लेग से हुई। इसके बाद किसी के पास कोई बहाना या तर्क नहीं था कि वो मास्क न पहनें।

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