G20 Summit in India: जी 20 के कार्यक्रम के लिए प्रगति मैदान के भारत मंडपम को बेहद खूबसूरत सजाया गया है। भारत मंडपम में लगाई गई नटराज की प्रतिमा ने सभी की ध्यान अपनी तरफ खींचा है। नटराज की यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है और दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ति है। नटराज को भगवान शिव का रूप माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव इस रूप में तांडव नृत्य की एक मुद्रा में हैं। यह मूर्ति 27 फीट ऊंची और 18 टन वजनी है।
G20 Summit: भारत मंडपम में लगी है नटराज की प्रतिमा, जानिए क्या है खासियत और चोल साम्राज्य से संबंध?
जानिए कैसे बनाई गई
इस मूर्ति का 'लॉस्ट वैक्स मेथड' से निर्माण किया गया है। इस विधि से चोल साम्राज्य में भी मूर्तियों को बनाया जाता था। लॉस्ट-वैक्स मेथड को छह हजार साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। सदियों तक लॉस्ट वैक्स मेथड से धातु की मूर्तियां बनाई जाती रहीं। चोल साम्राज्य में इस मेथड का खूब इस्तेमाल किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेथड के तहत सबसे पहले वैक्स यानी मोम का मॉडल तैयार किया जाता है। फिर इसको कावेरी नदी के तट की खास मिट्टी से कवर करते हैं। कई बार इस तरह किया जाता है। इसके बाद जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाती है, तो फिर मोम को पिघलाया जाता है। जब अंदर का मोम पिघल जाता है और फिर एक खोखला खाका तैयार होता है। इसके बाद इस खोखले ढांचे को पिघली हुई धातु से भरा जाता है।
माना जाता है कि चोल भगवान शिव के कट्टर भक्त थे। उन्होंने अपने शासन के दौरान भगवान शिव के कई मंदिरों का निर्माण कराया, लेकिन पहली बार पांचवीं सदी में नटराज के रूप में भगवान शिव की मूर्ति बनाई गई थी। वर्तमान में नटराज की जो मूर्ति दिखती हैं, वो चोलों के साम्राज्य में ही बनाई गई थीं। चोलों ने ही नटराज की तांबे की मूर्तियां बनवाई थीं।
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