एक समय ऐसा भी था, जब हमारा देश भारत अनाज के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर रहता था। लेकिन हरित क्रांति के बाद से हालात काफी तेजी से बदले और आज देश की तुलना दुनिया के बड़े अनाज उत्पादक देशों से हो रही है। भारत में कृषि को विकसित करने में काफी हद तक हाईटेक मशीनों का भी योगदान है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खेतों में उन्नत पैदावार के लिए किसान भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर ड्रोन्स का सहारा ले रहे हैं।
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कृषि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
साल 2020 में जब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था प्रभावित तो हुई, लेकिन इस दौरान कृषि के क्षेत्र में कई फायदे दिखे। वहीं बेहतर मानसून के कारण सरकार ने फसल वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) के दौरान 30.1 करोड़ टन अनाज की पैदावार का लक्ष्य रखा। यह लक्ष्य पिछले साल के उत्पादन से करीब 1.5 फीसदी अधिक है।
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कृषि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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अनाज पैदावार के लक्ष्य बढ़ाने का फैसला केवल यूं ही नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे एक कारण उन्नत तकनीक भी है। बता दें कि भारत के किसान अब केवल पारंपरिक तरीकों पर ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे तकनीक के मेल से पैदावार बढ़ा रहे हैं। भारत के उपजाऊ राज्य पंजाब की ही बात कर लें, तो वहां की सरकार ने पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर तैयार किया है। ये तकनीक मोबाइल फोन के जरिए किसानों को मिट्टी की उर्वरता से लेकर हवा की गुणवत्ता तक के बारे में बताता है, ताकि किसान उसके मुताबिक फैसला ले सकें।
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ड्रोन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
बता दें कि खेतों में अब ड्रोन्स का उपयोग भी आम हो चुका है। खेतों पर उड़ते हुए ड्रोन्स फसल की निगरानी कर डाटा जमा करते हैं। सही सेंसर इस्तेमाल करने से किसानों को रियल-टाइम डाटा मिल पाता है कि फसल कैसी तैयार हो रही है, कहां पर किसी तरह की खरपतवार पैदा हो रही है और कहां मिट्टी का उपजाऊपन घट रहा है। आंध्रप्रदेश ड्रोन के उपयोग में काफी आगे निकल चुका है, वहां मकई की खेती में इसका जमकर उपयोग हो रहा है।
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कृषि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि सिंचाई तकनीकों में भी काफी बदलाव हुए हैं। आज किसान टपक सिंचाई और सूक्ष्म बूंद सिंचाई जैसी तकनीक को अपना रहे हैं। सिंचाई की इन तकनीकों से पानी का सही मात्रा में उपयोग, पौधों को संतुलित रूप से पोषक तत्वों की पूर्ति और पैदावार में बढ़ोत्तरी जैसे लाभ प्राप्त हो रहे हैं।