उसने काली रंग की पैंट, काली जैकेट, काले जूते और हाथों में सफेद दस्ताने पहन रखे थे। उसके हाथों में मोबाइल फोन था। उसमें फ्रंट कैमरा था। उसे अपनी सेल्फी लेने का शौक था। उसने अपने फेसबुक पेज पर ऐसी कई सेल्फी लगा रखी थी।
सेल्फी जरूरी है या जिंदगी, जाहिर है जिंदगी...तो रिस्क क्यों लेते हैं जनाब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब बतौर संतान उसके मां-बाप के पास सिर्फ एक बेटी है, जो बार-बार अपने भाई के बारे में पूछ रही है। लेकिन, घर वाले उसे जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
सत्यम के पिता किसी से बात नहीं कर पा रहे हैं। वे सदमें में हैं। वे और उनके अधिकतर रिश्तेदारों की चितरपुर बाजार में बर्तनों की दुकान है। उसके दादा गंगा प्रसाद ने बीबीसी को बताया कि सत्यम की तबीयत थोड़ी खराब थी। वह घर से अपने पापा की दुकान पर आया, ताकि उसके पापा और चाचा घर जाकर खाना खा सकें। ऐसा हुआ भी। जब वे लोग खाना खाकर दुकान वापस लौट आए, तो सत्यम को खाने के लिए घर भेजा। लेकिन, वह घर जाने के बजाए अपने दोस्तों के साथ मायल स्टेशन चला गया और यह हादसा हो गया।
उन्होंने कहा, "हमें लगा कि वह घर गया है। चितरपुर में संडे बाजार लगा था, इसलिए भीड़ थी। तभी कुछ लोग हमारे पास आए और बताया कि एक लड़का स्टेशन पर जिंदा जल गया है। लोग उसे देखने जा रहे थे। हमलोग तब बैठे रहे, क्योंकि दुकान खुली थी। फिर कुछ और लोग आए और यही बात कही, तब हमलोग स्टेशन गए। वहां सत्यम की लाश पड़ी थी। पुलिस वालों ने उसे तौलिए से ढक दिया था। हमारे ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है। क्या पता हमें किस गलती की सजा मिली है।"
- कैसे हुई घटना
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने उसे ट्रेन की छत पर चढ़ते नहीं देखा, सिर्फ यह देखा कि वह जल रहा है और चिल्ला रहा है। उसे बचाने की कोशिश होती, उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। मायल के स्टेशन मास्टर मुकेश कुमार ने बताया कि वह मालगाड़ी दोपहर 3.42 पर यहां आकर रुकी थी और 3.55 बजे यह हादसा हुआ।रांची रेल मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा, "हमें उस युवक की मौत का बहुत दुख है। जिंदगी अनमोल है। ट्रेन की छत पर चढ़ना जानलेवा हो सकता है। जैसा कि इस घटना में हुआ है। लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए।"
- पहले भी गई हैं कई जानें
सत्यम की मौत के कुछ ही दिन पहले गुमला जि्ले के छिडिया जलप्रपात में पिकनिक मनाने गई 14 साल की पुनीता कुजूर सेल्फी लेने के क्रम में 40 फीट नीचे खाई में गिर गईं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जून 2019 में पिस्टल के साथ सेल्फी लेने के क्रम में गोली चल जाने से साहिबगंज जिले के पवन पासवान नामक युवक की मौत हो गई थी। इससे पहले फरवरी 2019 में ट्रेन के सामने सेल्फी लेने के दौरान 20 साल के फैसल की मौत हो गई थी। देश और दुनिया में इस तरह की कई और घटनाएं हुई हैं।
- सेल्फी के दौरान होने वाली सर्वाधिक मौतें भारत में
अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) के छात्रों के किए गए शोध के मुताबिक सेल्फी लेने के दौरान दुनिया में होने वाली सर्वाधिक मौतें भारत में हुई हैं। इसके बाद रूस, अमेरिका और पाकिस्तान का नंबर है। इन छात्रों ने अक्तूबर 2011 से नवंबर 2017 के बीच के आंकड़ों के आधार पर दावा किया कि उस दौरान सेल्फी लेने के क्रम में हुई 137 दुर्घटनाओं में कुल 259 लोगों की मौतें हुईं।उनका यह शोध पत्र 'अ बून और बेन' शीर्षक से 'जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसीन ऐंड प्राइमरी केयर' में प्रकाशित हुआ था। दुनिया में यह अपनी तरह का पहला शोध था। शोध के मुताबिक सेल्फी लेने के क्रम में जान गंवाने वालों में 72.5 फीसद पुरुष और 27.5 फीसद महिलाएं शामिल हैं। अगम बंसल, चंदन गर्ग, समीक्षा गुप्ता और अभिजीत के उस रिसर्च ने यह इशारा भी किया कि जान गंवाने वाले लोगों में ज्यादा संख्या युवाओं और टीनएजर्स की है।