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Chaitra Navratri 2021: पाकिस्तान सहित दुनिया के इन चार मुल्कों में भी है शक्तिपीठ, सालोभर दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु

Tue, 13 Apr 2021 07:03 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 13 Apr 2021 07:03 AM IST
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Chaitra Navratri 2021 know about maa durga shaktipeeth which located in foreign countries
मां दुर्गा - फोटो : सोशल मीडिया

भारत की पहचान सबसे पुरानी संस्कृति और सभ्यता के तौर पर होता है। फिर चाहे बात आप यहां की विविधता की कीजिए या फिर इसके सांस्कृतिक इतिहास की। यह तो सभी जानते हैं कि भारत की संस्कृति पूरे विश्व में सबसे पुरातन है, जिसका दायरा हिमालय के बर्फ से लेकर दक्षिण के श्रीलंका तक, पश्चिम के रेगिस्तान से पूर्व के नम डेल्टा तक फैला है। इतना ही नहीं भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो पूरे विश्व में मशहूर हैं। इसके साथ ही भारत में देवी के कई मशहूर शक्तिपीठ हैं। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत के अलावा दुनिया के अन्य चार देशों में भी देवी का शक्तिपीठ है।



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हिंगलाज मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

बलूचिस्तान का हिंगलाज मंदिर
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित यह पवित्र मंदिर हिंगलाज माता का मंदिर के तौर पर जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव माता सती की लाश अपने गोद में लिए थे, उस समय विष्णु भगवान ने सती माता का सिर काटने के लिए चक्र फेंका था। उस चक्र ने सीधे जाकर सती माता का सिर काट दिया। कटने के बाद माता सती का सिर सीधे आकर पृथ्वी पर गिरा। कहा जाता है कि पृथ्वी पर माता का सिर इसी जगह पर गिरा था। बाद में इसे हिंगलाज माता के मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।

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लंका शक्तिपीठ - फोटो : सोशल मीडिया

श्रीलंका में इंद्राक्षी या लंका शक्तिपीठ
श्रीलंका के जाफना के नल्लूर में स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी सती की पायल गिरी थी। यहां की शक्ति को इन्द्राक्षी कहा जाता है। इसी कारण इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी शक्तिपीठ भी कहते हैं। मान्यता ये भी है कि भगवान राम और देवराज इंद्र ने भी यहां पर देवी की पूजा की थी। भगवान राम से युद्ध कर रहे रावण ने भी इस मंदिर में शक्ति पूजा की थी।

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मानस शक्तिपीठ - फोटो : सोशल मीडिया

तिब्बत का मानस शक्तिपीठ
मान्यता ये है कि इस जगह पर माता सती कि बाईं हथेली गिरी थी। मानसरोवर के तट पर बने इस शक्तिपीठ को काफी प्रभावशाली माना जाता है। इस मंदिर में न केवल नवरात्र, बल्कि सालोभर श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बता दें कि तिब्बती धर्मग्रंथ 'कंगरी करछक' में मानसरोवर की देवी 'दोर्जे फांग्मो' का यहां निवास कहा गया है।

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गुजयेश्वरी शक्तिपीठ - फोटो : सोशल मीडिया

नेपाल में दो शक्तिपीठ
नेपाल में गंडकी शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि यहां पर मां सती का कपोल गिरा। इसके अलावा एक और शक्तिपीठ शुपतिनाथ मंदिर के पास बागमती नदी के तट पर है। इसे गुजयेश्वरी मंदिर पीठ के तौर पर जाना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती के दोनों घुटने गिरे थे। यहां की शक्ति को महाशिरा कहा जाता है।

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