Moon: अमेरिका ने 16 जुलाई 1969 को चांद पर मिशन भेजा था, जिसका नाम अपोलो 11 मिशन था। चांद की सतह पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग चांद की सतह पर पहुंचने वाले पहले इंसान बने। आर्मस्ट्रांग और उनके साथ गए बज एल्ड्रिन चांद पर आठ दिन तक रहे थे। इसके बाद वह 24 जुलाई 1969 को जब धरती पर लौटकर आए थे। वह चांद से एक चीज लेकर आए थे, जो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य की तरह थी।
Moon: चांद से मिट्टी लेकर आया था अमेरिका, धरती पर कंटेनर खुलते ही उड़े वैज्ञानिकों के होश, जानिए ऐसा क्या हुआ
क्यों हैरत में पड़ गए वैज्ञानिक
नासा के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन को चांद की सतह से मिट्टी लाने के लिए खास कंटेनर दिए गए थे। यह कंटेनर एल्युमिनियम के थे और पूरी तरह सील थे। चांद के लो प्रेशर को ध्यान में रखकर इसको डिजाइन किया था। दोनों अंतरिक्ष यात्री इस कंटेनर में करीब 50 पाउंड (करीबन 22.5 किलो) चांद की मिट्टी लेकर धरती पर आने के लिए रवाना हुए थे।
धरती पर आने के बाद जब कंटेनर को खोला गया, तो वैज्ञानिकों के होश उड़ गए। जिस कंटेनर में मून डस्ट यानी चांद की मिट्टी को लाया गया था, वह पूरी तरह तहस-नहस हो चुका था। विशेष डिजाइन के बाद भी कंटेनर मून डस्ट को नहीं झेल पाया। सवाल था कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
खतरनाक है चांद की मिट्टी?
वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी पर शोध किया, जिसके बाद वह हैरान हो गए। चांद की मिट्टी पृथ्वी की मिट्टी की तरह नहीं थी। एक तरह से यह सीसे के पाउडर की तरह था। नासा के मंगल मिशन में शामिल रही अंतरिक्ष यात्री केट ग्रीन ने अपने एक आर्टिकल में लिखकर बताया कि चांद की सतह पर लाखों उल्का पिंड की टक्कर हुई थी जिसके बाद मून डस्ट का निर्माण हुआ। उन्होंने बताया कि इसमें सिलिका और आयरन की तरह मेटल मिलते हैं। चांद की सतह पर न पानी है और न हवा। इस स्थिति में मून डस्ट बेहद शार्प होता है।
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खतरे में पड़ गई थी अंतरिक्ष यात्रियों की जान
चांद की मिट्टी की कितनी खतरनाक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 1972 में नासा के अंतरिक्ष यात्री हैरिसन स्मित की जान इसके कारण खतरे में पड़ गई थी। जब वह चांद पर घूमने के बाद अपने अंतरिक्ष यान में वापस आए, तो उनके स्पेस शूट में मून डस्ट चिपककर अंदर आ गई। गलती से सांस के साथ वह उनके अंदर चली गई। इसके कुछ क्षण बाद स्मित की आंखें लाल हो गईं और उनकी नाक से पानी गिरने लगा। वह बीमार पड़ गए और किसी तरह उनकी जान बची।
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