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दुनिया की वो 5 खतरनाक जासूस महिलाएं, जिनके बारे में जानकर हो जाएंगे हैरान

Tue, 21 Jul 2020 08:13 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 21 Jul 2020 08:13 PM IST
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5 dangerous spy women of the world whose story will surprise you
प्रतीकात्कम तस्वीर - फोटो : Pixabay

जासूसी ड्रामा आमतौर पर ऐसे होते हैं जिसे देखने पर इंसान अंदर तक हिल जाता है। अगर इसे लिखने वाली फोबे वालर-ब्रिज हों तो इसमें भी डार्क कॉमेडी का तड़का मिल जाता है। यही कारण है कि फोबे का नया ड्रामा 'किलिंग ईव' खुद में एक जासूसी कहानी और सिटकॉम (सिचुएशनल कॉमेडी) को समेटे हुए है।



जासूसी कहानियों में किसी महिला का खूनी होना हमेशा ही आकर्षित करता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि महिलाओं का इस तरह के किरदार में कम देखा जाना और जो सामान्य नहीं होता वो हमेशा आकर्षित करता है। ये तो हो गई काल्पनिक कहानियों की बात, लेकिन ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी जो अपनी असल जिंदगी में एक खतरनाक जासूस रहीं और उनका जीवन हैरान करने वाली कहानियों से भरा रहा।

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माता हारी - फोटो : Wikipedia

डबल एजेंट 'माता हारी'
मार्गेथा गीरत्रुइदा मैकलियोड जिसे 'माता हारी' के नाम से जाना जाता है। माता हारी एक कामुक नृत्यांगना थीं, जिसे प्रथम विश्व युद्ध में जासूसी करने के आरोप में गोली मार दी गई। माता हारी की जिंदगी पर साल 1931 में हॉलीवुड फिल्म बनी जिसमें ग्रेटा गर्बो मुख्य भूमिका में थीं। मार्गेथा का जन्म हॉलैंड में हुआ था और शादी एक फौजी कैप्टन से। एक बुरे रिश्ते में फंसी मार्गेथा ने अपने नवजात बच्चे को भी खो दिया।

साल 1905 मार्गेथा ने खुद को 'माता हारी' की पहचान दी और इटली के मिलान स्थित ला स्काला और पेरिस के ओपेरा में एक कामुक नृत्यांगना बनकर उभरीं। अब मार्गेथा खो चुकी थीं और जो दुनिया में जो थी उसे लोग माता हारी के नाम से जानते थे। अपने पेशे के कारण उनके लिए सफर करना आसान था। इस कारण जर्मनी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान माता हारी को पैसे के बदले जानकारियां साझा करने का प्रस्ताव दिया और इस तरह वह जर्मनी की जासूस बनीं।

माता हारी ने खुद तो किसी को नहीं मारा, लेकिन उनकी जासूसी ने लगभग 50 हजार फ्रांसिसी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। इसके बाद फ्रांस को उन पर शक होने लगा। फरवरी 1917 में उन्हें पेरिस से गिरफ्तार कर लिया गया और अक्टूबर में उन्हें गोली मार दी गई। उनकी मौत के 100 साल बाद उनके अपराध पर बहस फिर शुरू हो गई। माता हरि को आज भी 'फेमिनिन सिडक्शन' और देश को धोखा देने वाले प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

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शॉर्लेट कॉर्डी - फोटो : Wikipedia

शॉर्लेट कॉर्डी
शॉर्लेट का पूरा नाम मैरी एन शार्लेट डी कॉर्डी था और वह फ्रांस की क्रांति का हिस्सा रहीं। शॉर्लेट एक गिरोडिन थीं। फ्रांस की क्रांति में गिरोडिन वो हुए जो राजशाही तो खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हिंसा के खिलाफ थे। लेकिन क्रांति के लिए हिंसा को ना अपनाने वाली शॉर्लेट ने अपने विपक्षी जैकोबिन समूह के नेता जीन पॉल मैराट की हत्या की।

जुलाई साल 1793 शार्लेट ने मैराट को उस वक्त चाकू मारा, जब वो बाथटब में नहा रहे थे। जब उन्हें इस हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया तो शॉर्लेट ने इसे देश हित में की गई हत्या कहा। उन्होंने दावा किया कि इस एक हत्या से उन्होंने सैकड़ों-हजारों की जान बचाई है। लेकिन इसके चार दिन बाद ही उन्हें सजा मिली।

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शी जिआनकिआओ - फोटो : Wikipedia

शी जिआनकिआओ
जासूस अपना उपनाम रखना पसंद करते हैं और इसी तथ्य को यथार्थ में बदलते हुए शी गुलान ने जासूसी की दुनिया में खुद का नाम शी जिआनकिआओ रखा। जिआनकिआओ अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए जासूस बनीं। इनकी हत्या चीन के नेता सुन चुआंगफांग ने 1925 में की थी।

10 साल बाद जिआनकिआओ ने चुआंगफांग के सिर में तब गोली मारी जब वह एक बौद्ध मंदिर में पूजा कर रहे थे। इस हत्या को अंजाम देने के बाद घटनास्थल से भागने के बजाय वह वहीं रुकी रही और अपना गुनाह कबूल किया। इस हाई प्रोफाइल केस में 1936 में फैसला आया और जिआनकिआओ को बरी कर दिया गया। इस केस में कोर्ट का कहना था कि ये हत्या अपने पिता की हत्या से आहत होकर की गई है। साल 1979 में शी जिआनकिआओ की मौत हुई।

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रेड आर्मी फैक्शन - फोटो : सोशल मीडिया

ब्रिगित मोअनहॉप्ट
एक वक्त में जर्मनी की सबसे खूंखार महिला मानी जाने वाली ब्रिगित मोअनहॉप्ट रेड आर्मी फैक्शन की सदस्य रहीं। ब्रिगित 1977 में जर्मनी में एक आतंकी गतिविधि में शामिल रहीं। 70 के दशक में पश्चिम जर्मनी में एक वाम चरमपंथी समूह द्वारा एक के बाद एक कई हाईजैक, हत्याएं और बम धमाके किए गए। जहाज हाईजैक के साथ लगभग 30 लोगों की हत्या इस समूह ने की। ये अपराध पश्चिम जर्मनी में पूंजीवाद को खत्म करने के नाम पर किए गए।

1982 में इस अपराध में शामिल होने के कारण मोअनहॉप्ट को गिरफ्तार किया गया और पांच साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा उन्हें नौ अन्य हत्याओं के मामले में 15 साल की सजा दी गई। मोअनहॉप्ट ने कभी अपना जुर्म कबूल नहीं किया और 2007 में उन्हें परोल पर जेल से बाहर आने का मौका मिला।

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