कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के खिलाफ एक सशक्त आक्रोश मार्च का आयोजन किया, जिसने बिहार में राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं ने पूर्णिया और समस्तीपुर में एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने स्मार्ट मीटर को गरीबों के खिलाफ एक साजिश करार दिया।
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स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदर्शन करते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
पूर्णिया में निकाला आक्रोश मार्च
पूर्णिया के गोकुल कृष्ण आश्रम से शुरू हुआ यह आक्रोश मार्च कांग्रेस जिलाध्यक्ष छोटू सिंह उर्फ नीरज सिंह के नेतृत्व में आरएन साह चौक तक गया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और पार्टी के झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नीरज सिंह ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ अपना रुख नहीं बदला, तो कांग्रेस राज्य में सरकार को बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ‘बिहार में सबसे महंगी बिजली क्यों?’ उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रीपेड मीटर लगाना पूरी तरह से असंगत है।
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स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदर्शन करते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
समस्तीपुर में भी किया प्रदर्शन
इसी सिलसिले में समस्तीपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक जुलूस निकाला और बिजली कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष अबू तमीम ने कहा कि पहले सामान्य मीटर से 200-300 रुपये का बिल आता था, लेकिन अब स्मार्ट मीटर के चलते हर 10-15 दिनों में 1000 रुपये चार्ज करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘स्मार्ट मीटर लोगों का बजट बिगाड़ रहा है’ और इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखने की बात कही।
सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
कांग्रेस के नेताओं ने स्मार्ट मीटर को ‘स्मार्ट चीटर’ बताया और कहा कि यह व्यवस्था केवल गरीबों को लूटने का एक माध्यम है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य त्रिपुरारी शर्मा ने बताया कि सरकार युवा और आम नागरिकों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल रिचार्ज खत्म होने पर कई दिन तक इनकमिंग कॉल की सुविधा होती है, लेकिन स्मार्ट मीटर में रिचार्ज खत्म होते ही बिजली काट दी जाती है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार स्मार्ट मीटर को वापस नहीं ले लेती। उन्होंने कहा कि सरकार की लूट के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि गरीबों के हक की लड़ाई है।