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Diwali 2024: दिवाली पर सज-धजकर तैयार हुआ मुजफ्फरपुर का लक्ष्मी और गणेश मंदिर, महामारी के समय हुआ था निर्माण

Thu, 31 Oct 2024 03:07 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 31 Oct 2024 03:07 PM IST
सार

बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित जिले का एकमात्र लक्ष्मी और गणेश मंदिर दिवाली के अवसर पर सज-धजकर तैयार हो गया है। मंदिर में पांच क्विंटल लड्डू का भोग लगाया जाएगा।

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Diwali 2024 Muzaffarpur Lakshmi and Ganesh temple is decorated for Diwali it was built during pandemic
लक्ष्मी और गणेश मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरपुर जिले का एक मात्र सबसे बड़ा भव्य लक्ष्मी और गणेश मंदिर सज-धज कर तैयार हो गया है। आज दिवाली पर यहां विशेष रूप में पूजन और महाशृंगार किया जाएगा। इसको लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष रूप में तैयारी किया है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के MIT के पास लक्ष्मी चौक पर यह मंदिर स्थित है। इस बार मंदिर में माता लक्ष्मी और गणेश जी को पांच क्विंटल लड्डू का भोग लगाया जाएगा और इसका निर्माण कराया जा रहा है।

Diwali 2024 Muzaffarpur Lakshmi and Ganesh temple is decorated for Diwali it was built during pandemic
मंदिर में मौजूद भक्त - फोटो : अमर उजाला

जिले के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित एक मात्र लक्ष्मी और गणेश जी का मंदिर इस दिवाली पर्व पर भी सज-धज कर तैयार है। बीते एक महीने से तैयारी चल रही थी, जिसे पूरा कर लिया गया है। मंदिर की विशेष सजावट किया गया है, जिसको लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस मंदिर में दिवाली की शाम से लेकर अहसुबह तक भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। इसको लेकर के मंदिर प्रशासन के द्वारा इंतज़ाम किए गए हैं। 

यही नहीं मंदिर में होने वाली एक विशेष पूजा आकर्षण का केंद्र बनता है और इसमें कई पुरोहित के पूजन हवन का भी आयोजन किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु के बीच में महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। इस बार भी मंदिर में पांच क्विंटल लड्डू का भोग लगाया जा रहा है और इसके बाद इसको आए हुए भक्त में प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी।

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पूजा पाठ करते हुए भक्त - फोटो : अमर उजाला

साल 1921 में हुई थी मंदिर स्थापना
इस मंदिर की अनोखी पहचान है। इसका शिखर 50 से 55 फीट ऊंचा है। जहां से देखने के बाद मंदिर के अंदर केवल माता लक्ष्मी और गणेश भगवान की अदभुत प्रतिमा स्थापित दिखती है। इस मंदिर की नींव को साल 1921 में स्थापित किया गया था। नेपाल से आए हुए कई साधुओं ने इसका निर्माण किया था। तब उस समय पूरे बिहार में महामारी फैली हुई थी। महामारी में हजारों लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद इस मंदिर को स्थापित किया गया और यहां पूजन कार्य शुरू हुआ। ऐसी मान्यता है कि मंदिर निर्माण के बाद बिहार में फैली महामारी दूर हो गई।

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