बिहार में मस्तिष्क ज्वर (चमकी बुखार) सहित अन्य अज्ञात बीमारी की वजह से अब तक 69 जानें जा चुकी हैं। मरने वालों में बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। जबकि इसकी चपेट में आने वाले बच्चों की संख्या 203 तक पहुंच गई है। इस बीमारी का सर्वाधिक असर मुजफ्फरपुर जिले में हो रहा है।
बिहार में दिमागी बुखार का बढ़ता कहर, मौत के आगे डॉक्टर भी बेबस
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रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि लीची में पाया जाने वाले एक विषैले तत्व की वजह से यह मौतें हो रही हैं। बिहार शासन के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम नाम की बीमारी का असर इंसानी दिमाग पर बुखार के रूप में पड़ता है।
मुजफ्फपुर जिले के दो अस्पतालों में जनवरी 2019 से अब तक इस बीमारी के 179 से ज्यादा मामले आ चुके हैं। हालांकि मौत केवल पिछले दो सप्ताह में हुई हैं। वर्ष 2013 में इंसेफलाइटिस की वजह से उत्तर प्रदेश में भी करीब 351 मौतें हुई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भीषण गर्मी और गर्म हवाओं की वजह से इस साल भी इस बीमारी की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
बिहार का स्वास्थ्य महकमा राज्य में हो रही इन मौतों की वजह हाइपोग्लाइसीमिया नामक बीमारी को मानता है। इसे लो-ब्लड-शुगर भी कहते हैं। हालांकि इसके साथ ही मुजफ्फरपुर में बहुतायत में उगने वाली लीची भी कम जिम्मेदार नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार की वजह से मृत बच्चों के लीवर में एक ऐसा विषैला तत्व पाया गया है, जो लीची में पाया जाता है। यह जहरीला तत्व बच्चों के लीवर में एकत्रित होता रहता है और जैसे ही वातावरण में गर्मी बढ़ती है इसका असर दिखना शुरू हो जाता है।